Class 7 Sanskrit Chapter 6 HINDI TRANSLATION – क्रीडाम वयं श्लोकान्त्याक्षरीम्

संस्कृत भाषा में श्लोकों का विशेष महत्व है। यह पाठ विद्यार्थियों के बीच संस्कृत श्लोकों की अन्त्याक्षरी के माध्यम से ज्ञान एवं मनोरंजन का समन्वय प्रस्तुत करता है। दो गणों में विभाजित छात्र – छात्राएँ अन्त्याक्षरी खेलते हुए संस्कृत श्लोकों का उच्चारण करते हैं, जिससे उनकी स्मरणशक्ति, भाषा – ज्ञान और उच्चारण सुधरता है। इस … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 5 HINDI TRANSLATION – सेवा हि परमो धर्मः

इस पाठ में हम मानवीय गुणों के बारे में जानेंगे। करुणा, सेवा, उदारता, परोपकार, गुस्सा न करना इत्यादि ऐसे मानवीय गुण हैं जो सब मनुष्यों में होने आवश्यक हैं। जीवन में विद्या, धन, पद आदि की तो महत्ता है ही किन्तु इनके साथ मानवीय गुणों का होना भी बहुत ज़रूरी है। शिक्षिका – प्रियच्छात्राः! जीवने … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 4 HINDI TRANSLATION – न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्

इस पाठ में एक ऐसे सियार की कहानी बताई गई है, जो बहुत भूखा होता है। जंगल में लगी अंगूर की बेल को देखकर वह उसे खाने की बहुत कोशिश करता है। परंतु उस बेल की ऊँचाई तक वह पहुँच नहीं पाता है। आखिर में वह थककर बिना रसास्वाद लिए ही अंगूर को खट्टा कहता … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 3 HINDI TRANSLATION – मित्राय नमः

एका छात्रा – अहो ! योगिते त्वं प्रातः किं करोषि ? योगिता – अहं प्रतिदिनं प्रातः पित्रा सह उद्यानं गच्छामि । एका छात्रा – उद्याने किं करोषि भो : ? योगिता – अहं तु भ्रमणं करोमि। किन्तु बहवः जनाः तत्र व्यायामं योगासनानि च कुर्वन्ति । एका छात्रा – अहो योगासनानि! वयम् अपि ज्ञातुम् इच्छामः। योगिता … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 2 HINDI TRANSLATION– नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्

संस्कृत भाषा में सुभाषितों का बहुत महत्व है। सुभाषित शब्द संस्कृत में ‘सु’ उपसर्ग एवं ‘भाष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है- सुंदर वचन । संस्कृत भाषा में अनेक सुभाषित विद्यमान हैं जो हमें नैतिकता, सत्कर्म, ज्ञान, सदाचार आदि की प्रेरणा देते हैं। इनका प्रभाव हमारे व्यवहार, सोच और आचरण पर सकारात्मक होता है। … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 1 HINDI TRANSLATION – वन्दे भारतमातरम्

इस पाठ में पवित्र भूमि भारत की विशेषताओं का वर्णन प्राप्त है। इसके मस्तक पर हिमालय मुकुट के समान सुशोभित है। समुद्र इसके चरणों को धोते हैं। यहाँ बहने वाली नदियाँ माता के समान प्राणियों का पालन-पोषण करती हैं। भारत में अनेक तीर्थस्थल हैं। भारत के राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग क्रमशः केसरिया, सफ़ेद एवं … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 12 :Hindi Translation – सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते

प्रस्तुत पाठ का शीर्षक श्लोक का एक हिस्सा है जो पाणिनीय शिक्षा ग्रंथों से उद्धृत है। इसमें बताया गया है वर्ण का स्पष्ट मधुर और सम्यक् उच्चारण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह पाठ हमें भाषा (वाणी) की शुद्धता मात्र शब्द नहीं, बल्कि चरित्र और आत्मा को सँवारने का मार्ग है। पाठ का आरंभ छात्र और आचार्य … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 11 :Hindi Translation – सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः)

स्तुत नाटक ‘मृच्छकटिकम्’ से लिया गया है जिसके लेखक राजा शूद्रक थे। इस नाटक में राजा और राज्य की रक्षा हेतु सेवक के कर्त्तव्य की सेवाभाव की पराकाष्ठा दृष्टिगत होती है और राजा भी अपने सेवक व उसके परिवार को बचाने के लिए सर्वस्व त्याग करने को तत्पर है। शिक्षाप्रद व प्रेरणादायक यह नाटक एक … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 10 :Hindi Translation– सन्निमित्ते वरं त्यागः (क-भागः)

संस्कृत साहित्य कथाओं का विशेष महत्त्व है । पञ्चतन्त्र और हितोपदेश की कथाएँ अत्यधिक लोकप्रिय हैं। प्रस्तुत पाठ मूलतः हितोपदेश से गृहीत है। प्रस्तुत कथा को दो भागों में विभक्त किया गया है। एक बार शोभावती नगरी के राजा शूद्रक के यहाँ वीरवर नामक राजकुमार आजीविका के लिए आया। राजा ने उसे अपना सेवक नियुक्त … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 9:Hindi Translation– कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?

एक बार भगवान धन्वन्तरि पृथ्वीलोक पर चिकित्सा व्यवस्था के विषय में जानने के लिए एक सुन्दर तोते के रूप में भ्रमण करने लगे। वे किसी भी वैद्य के घर के पास स्थित वृक्ष पर बैठकर प्रश्न करते थे – ‘स्वस्थ कौन है ? ‘ परन्तु उन्हें कहीं से भी उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अन्त में … Read more