Class 8 Sanskrit Chapter 11 सावित्री बाई फुले

ऊपर बने हुए चित्र को देखो। यह चित्र किसी पाठशाला का है। यह सामान्य विद्यालय नहीं है। यह महाराष्ट्र की पहली कन्या पाठशाला है। एक अध्यापिका घर से पुस्तकें लेकर चलती है। मार्ग में कोई उसके ऊपर धूल और कोई पत्थर के टुकड़े फेंकता है। परन्तु वह अपने दृढ़ निश्चय से विचलित नहीं होती है। … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 10 नीतिनवनीतम्

(क) अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥1॥ अन्वयः- अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः तस्य आयुर्विद्यायशोबलम् (इति) चत्वारि वर्धन्ते। शब्दार्थ- अभिवादन:-प्रणाम। उपसेविन:-सेवा करने वाले का। चत्वारि-चार। वर्धन्ते-वृद्धि को प्राप्त होते हैं। सरलार्थ- प्रणाम करने वाले तथा नित्य वृद्ध लोगों की सेवा करने वाले (व्यक्ति) की आयु, विद्या, यश तथा बल-ये चार वस्तुएँ वृद्धि को प्राप्त … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 9 सप्तभगिन्यः

अध्यापिका – सुप्रभात। छात्राएँ – सुप्रभात, सुप्रभात। अध्यापिका – अच्छा, आज क्या पढ़ना है? छात्राएँ – हम सभी अपने देश के राज्यों के विषय में जानना चाहती हैं। अध्यापिका – सुन्दर। बोलो। हमारे देश में कितने राज्य हैं? सायरा – महोदया, चौबीस। सिल्वी – नहीं, नहीं। महाभागा! पच्चीस राज्य हैं। अध्यापिका – कोई अन्य भी … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 6 गृहं शून्यं सुतां विना

शालिनी गर्मी की छुट्टियों में पिता के घर आती है। सभी प्रसन्नमन होकर उसका स्वागत करते हैं, परन्तु उसकी भाभी उदासीन-सी दिखाई पड़ती है। शालिनी – भाभी, (तुम) चिन्तित-सी प्रतीत होती हो। सभी कुशल तो हैं? माला – मैं कुशल हूँ। तुम्हारे लिए क्या लाऊँ? चाय या ठण्डा? शालिनी – इस समय मैं कुछ नहीं … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 5 कण्टकेनैव कण्टकम्

चञ्चल नामक कोई शिकारी था। वह पक्षियों और पशुओं आदि को पकड़ कर अपनी जीविका का निर्वाह करता था। एक बार वह जंगल में जाल फैलाकर घर आ गया। दूसरे दिन प्रातःकाल जब चञ्चल वन में गया, तब उसने देखा कि उसके द्वारा फैलाए गए जाल में दुर्भाग्य से एक बाघ बँधा हुआ था। उसने … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम्

(क) चल चल पुरतो निधेहि चरणम्। सदैव पुरतो निधेहि चरणम्॥ गिरिशिखरे ननु निजनिकेतनम्। विनैव यानं नगारोहणम्॥ बलं स्वकीयं भवति साधनम्। सदैव पुरतो …………॥ सरलार्थ- चलो, चलो। आगे चरण रखो। सदा ही आगे कदम रखो। निश्चय ही अपना घर पर्वत की चोटी पर है। अतः सवारी के बिना ही पर्वत पर चढ़ना है। अपना बल ही … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 3 डिजीभारतम्

आज सारे संसार में ‘डिजिटल इण्डिया’ की चर्चा सुनी जाती है। ‘इस शब्द का भाव क्या है’-ऐसी जानने की इच्छा उत्पन्न होती है। काल के परिवर्तन के साथ मानव की आवश्यकता भी परिवर्तित होती है। पुराने समय में ज्ञान का आदान-प्रदान वाणी के द्वारा होता था तथा विद्या श्रवण परम्परा से गृहीत की जाती थी। … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 2 बिलस्य वाणी न कदापि में श्रुता

किसी वन में खरनखर नामक शेर  रहता था। किसी समय भूख से व्याकुल होकर इधर-उधर घूमते हुए उसे कुछ भी भोजन प्राप्त न हुआ। तब सूर्य के अस्त होने के समय एक विशाल गुफा को देखकर वह सोचने लगा-“निश्चित रूप से इस गुफा में रात में कोई प्राणी आता है। अतः यहाँ पर ही छिप … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 15 लालनगीतम्

(क) उदिते सूर्ये धरणी विहसति। पक्षी कूजति कमलं विकसति॥1॥ सरलार्थ : सूर्य के उगने पर (निकलने पर) पृथ्वी हँस रही है, पक्षी चहचहा रहा है, कमल खिल रहा है। (ख) नदति मन्दिरे उच्चैढक्का। सरितः सलिले सेलति नौका॥2॥ सरलार्थ : मन्दिर में नगाड़ा ज़ोर से आवाज़ कर रहा है। नदी के जल में नाव डगमगा रही … Read more

Class 7 Sanskrit Chapter 14 अनारिकायाः जिज्ञासा

बालिका अनारिका के मन में हमेशा बड़ा कुतूहल (जानने की इच्छा) होता है। इसलिए वह बहुत प्रश्न पूछती है। उसके प्रश्नों से सबकी बुद्धि पहिए के समान घूमने लगती है। सुबह उठकर उसने अनुभव किया कि उसका मन प्रसन्न (खुश) नहीं है। मन प्रसन्न करने के लिए वह घूमने के लिए घर से बाहर गई। … Read more