Class 6th Sanskrit Chapter 4 विद्यालयः

प्रश्न 1.उच्चारणं कुरुत। उत्तर:-छात्र स्वयं उच्चारण करें। प्रश्न 2.निर्देशानुसारं परिवर्तनं कुरुत यथा-अहं पठामि। – (बहुवचने) – वयं पठामः। (क) अहं नृत्यामि। – (बहुवचने) ………….. (ख) त्वं पठसि। – (बहुवचने) ………….. (ग) युवां क्रीडथः। – (एकवचने) ………….. (घ) आवां गच्छावः। – (बहुवचने) ………….. (ङ) अस्माकं पुस्तकानि। – (एकवचने) – ………….. (च) तव गृहम्। – (द्विवचने) – … Read more

Class 6th Sanskrit Chapter 5 वृक्षाः

प्रश्न 1.वचनानुसारं रिक्तस्थानानि पूरयत- उत्तर: प्रश्न 2.कोष्ठकेषु प्रदत्तशब्देषु उपयुक्तविभक्तिं योजयित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- यथा-अहं रोटिकां खादामि। (रोटिका) (क) त्वं …………. पिबसि। (जल) (ख) छात्रः …………… पश्यति। (दूरदर्शन) (ग) वृक्षाः …………….. पिबन्ति। (पवन) (घ) ताः …………… लिखन्ति। (कथा) (ङ) आवाम् …………… गच्छावः। (जन्तुशाला) उत्तर: (क) जलम् (ख) दूरदर्शनम् (ग) पवनम् (घ) कथां (ङ) जन्तुशालाम् प्रश्न 3.अधोलिखितेषु वाक्येषु … Read more

Class 6th Sanskrit Chapter 4 विद्यालयः

प्रश्न 1.उच्चारणं कुरुत। उत्तर:-छात्र स्वयं उच्चारण करें। प्रश्न 2.निर्देशानुसारं परिवर्तनं कुरुत यथा-अहं पठामि। – (बहुवचने) – वयं पठामः। (क) अहं नृत्यामि। – (बहुवचने) ………….. (ख) त्वं पठसि। – (बहुवचने) ………….. (ग) युवां क्रीडथः। – (एकवचने) ………….. (घ) आवां गच्छावः। – (बहुवचने) ………….. (ङ) अस्माकं पुस्तकानि। – (एकवचने) – ………….. (च) तव गृहम्। – (द्विवचने) – … Read more

Class 6th Sanskrit Chapter 3 शब्द परिचयः

प्रश्न 1.(क) उच्चारणं कुरुत- (उच्चारण कीजिए- Read it out.) (ख) चित्राणि दृष्ट्वा पदानि उच्चारयत- (चित्रों को देखकर शब्दों का उच्चारण कीजिए Look at the pictures and pronounce these words.) प्रश्न 2. (क) वर्णसंयोजनं कृत्वा पदं कोष्ठके लिखत- (वर्णों को जोड़कर शब्द कोष्ठक में लिखिए Combine the letters and write down the word in the box.) … Read more

Class 6th Sanskrit Chapter 2 शब्द परिचयः

प्रश्न 1.(क) उच्चारणं कुरुत- (ख) चित्राणि दृष्ट्वा पदानि उच्चारयत- प्रश्न 2.(क) वर्ण संयोजनं कृत्वा पदं कोष्ठके लिखत- (वर्णों को जोड़कर पद कोष्ठक में लिखिए Join the letters and write down the word in the box.) उत्तर: उद्याने स्थालिका घटिका स्त्रीलिङ्गः मापिका। (ख) पदानां वर्णविच्छेदं प्रदर्शयत- (पदों का वर्ण-विच्छेद प्रदर्शित कीजिए- Separate the letters of the … Read more

Class 6 Sanskrit Chapter 1 शब्द परिचयः

प्रश्न 1. (क) उच्चारणं कुरुत- (उच्चारण कीजिए- (ख) चित्राणि दृष्ट्वा पदानि उच्चारयत- प्रश्न 2.(क) वर्णसंयोजनेन पदं लिखत- (ख) पदानां वर्णविच्छेदं प्रदर्शयत- (पदों का वर्ण-विच्छेद प्रदर्शित कीजिए- उत्तर: प्रश्न 3.उदाहरणं दृष्ट्वा रिक्तस्थानानि पूरयत- (उदाहरण देखकर रिक्त स्थान भरिए- Look at the example and fill in the blanks.) उत्तर: प्रश्न 4.चित्राणि दृष्ट्वा संस्कृतपदानि लिखत- (चित्रों को देखकर … Read more

प्रहेलिकाः Class 8 Sanskrit Chapter 15

(क) कस्तूरी जायते कस्मात्? को हन्ति करिणां कुलम्? किं कुर्यात् कातरो युद्धे? मृगात् सिंहः पलायते॥1॥ अन्वयः- कस्तूरी कस्मात् जायते? मृगात्। कः करिणां कुलं हन्ति? सिंहः। कातरः युद्धे किं कुर्यात्? पलायते। सरलार्थ- (प्रश्न) कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है? (उत्तर) मृग से। (प्रश्न) कौन हाथियों के समूह को मार डालता है? (उत्तर) सिंह। (प्रश्न) कायर युद्ध में … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 14 आर्यभटः

सूर्य पूर्व दिशा में निकलता है तथा पश्चिम में अस्त होता है-ऐसा संसार में दिखाई देता है। परन्तु इससे यह नहीं समझना चाहिए कि सूर्य गतिशील है। सूर्य स्थिर है और पृथिवी गतिशील है, जो अपनी धुरी पर घूमती है-यह सिद्धान्त अब भली प्रकार स्थापित हो चुका है। यह सिद्धान्त जिनके द्वारा सर्वप्रथम प्रवर्तित किया … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

(क) सुपूर्णं सदैवास्ति खाद्यान्नभाण्डं नदीनां जलं यत्र पीयूषतुल्यम्। इयं स्वर्णवद् भाति शस्यैधरेयं क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः॥1॥ अन्वयः- खाद्यान्नभाण्डं सदैव सुपूर्णं अस्ति। यत्र नदीनां जलं पीयूषतुल्यम् (अस्ति)। इयं धरा शस्यैः स्वर्णवत् भाति। भारतस्वर्णभूमिः क्षितौ राजते। शब्दार्थ- भाण्डम्-पात्र। यत्र-जहाँ। पीयूषतुल्यम्-अमृत के समान। स्वर्णवत्-सोने के समान। शस्यैः-फसलों के द्वारा। धरा-पृथ्वी। क्षितौ-पृथ्वी पर। सरलार्थ-खाद्यान्न के पात्र सदा परिपूर्ण रहते हैं। … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

(क) (ग्रीष्मौ सायंकाले विद्युदभावे प्रचण्डोष्मणा पीडितः वैभवः गृहात् निष्क्रामति) वैभवः – अरे परमिन्दर्! अपि त्वमपि विद्युदभावेन पीडितः बहिरागतः? परमिन्दर् – आम् मित्र! एकतः प्रचण्डातपकालः अन्यतश्च विद्युदभावः परं बहिरागत्यापि पश्यामि यत् वायुवेगः तु सर्वथाऽवरुद्धः। सत्यमेवोक्तम् प्राणिति पवनेन जगत् सकलं, सृष्टिर्निखिला चैतन्यमयी। क्षणमपि न जीव्यतेऽनेन विना, सर्वातिशायिमूल्यः पवनः॥1॥ विनयः – अरे मित्र! शरीरात् न केवलं स्वेदबिन्दवः अपितु … Read more