सद्गति
यह प्रेमचंद जी एक चर्चित कहानी है | यह मानसरोवर पत्रिका में 1931 में प्रकाशित हुई थी | सन 1981 में प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजीत राय ने इस पर फिल्म बनाई | इस कहानी में तत्युगीन वर्णाश्रमधर्मी समाज व्यवस्था के अंतर्गत दलितों के प्रति अमानवीय व्यवहार को दर्शाया गया है | कहानी का नायक दलित … Read more
नया विवाह
नया विवाह मुझसे प्रेमचंद द्वारा रचित एक बहुत ही सुंदर कहानी है यह कहानी सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित है कहानी के केंद्र में लाला डंगामल है जिनकी आयु 45 वर्ष है उनकी पत्नी लीला रोग, उपेक्षा और प्रेम के अभाव में प्राण त्याग देती है । देहलोलुप डंगामल आशा नामक युवती से विवाह कर लेते … Read more
विद्यापति की पदावली
बिहार के दरभंगा जिले में विपसी गांव में जन्मे विद्यापति (1350 -1450) हिंदी के आदि गीतकार माने जाते हैं |ये तिरहुत के राजा शिव सिंह और कीर्मति सिंह के दरबारी कवि थे| ये शैव सम्मप्धुरदाय के कवि हैं | मधुर गीतों के रचयिता होने के कारण इन्हें अभिनव जय देव के नाम से भी जाना … Read more
अमीर खुसरो काव्य
हिंदी में खड़ी बोली के प्रथम काव्य प्रयोग का श्रेय इन्हीं को जाता है |इनका वास्तविक नाम अबुल हसन था | यह निजामुद्इदीन औलिया के शिष्य थे | इन्होने दिल्ली के सिंहासन पर 11 राजाओं का आरोहण देखा था |इन्होने हिन्दुओं -मुसलमानों में एकता स्थापित करने का प्रेस किया | या अनेक भाषाओँ ( अरबी, … Read more
वर्ण रत्नाकर
मैथिली हिंदी में रचित यह एक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है| मैथिलि कवि ज्योतिशेखर ठाकुर इसके लेखक हैं| इसकी रचना 14 वीं सदी के आस-पास मानी जाती है|यह एक शब्दकोशनुमा ग्रन्थ है |इसमें कवित्व, आलंकारिकता तथा शब्दों की तत्सम प्रवृतियाँ मिलाती हैं |हिंदी गद्य के विकास में इसका एक महत्त्वपूर्ण स्थान है |
उक्ति व्यक्ति प्रकरण
दामोदर शर्मा द्वारा रचित यह रचना 12 वीं शताब्दी की है| यह एक प्रमुख व्याकरण ग्रन्थ हैं | इसमें बनारस और इसके आस-पास के क्षेत्र की तत्कालीन संस्कृति तथा भाषा का वन्न किया गया है| इसके भाषा अध्ययन से तत्कालीन गद्य-पद्य दोनों शैलियों की हिंदी भाषा में तत्सम पदावली के प्रयोग की प्रवृति का ज्ञान … Read more
बीसलदेव रासो
इसके रचयिता नर पति नाल्ह हैं | यह आदिकाल की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक है | यह कथा 120 छंदों और 4 कह्यन्हदों में विभक्त है एक प्रेम काव्य है जो संयोग व वियोग के गीतों से युक्त है |इसमें अजमेर के राजा बीसलदेव तृतीय तथा भोज परमार की पुत्री राजमती के विवाह, वियोग … Read more
ढोला मारू रा दूहा
इसके रचनाकार “कुशलराय” हैं| ग्याहरवीं सदी में रचित यह ग्रन्थ मूलतः दोहों में लिखा गया है| कछवाहा वंश के राजा नल के पुत्र ढोला और पूगल के राजा पिंगल की रूपवती कन्या मारू (मारवाड़ी) की प्रेमकथा है |यह पश्चिमी राजस्थान की अति लोकप्रिय काव्य कृति है | इस राजस्थानी लोककथा में ढोला और मारवाड़ी को … Read more