संचार माध्यम ओर हिंदी

संचार=एक सोचना को दूसरों तक पहुँचाना ।अंग्रेज़ी शब्द कम्यूनिकेशन- किसी बात को आगे बढ़ाना या चलाना। संचार की प्रमुख परिभाषाएँ- राबर्ट एंडरसन- वाणी लेखन या संकेतों के द्वारा विचारों, अभिमतों अथवा सूचना का विविध विनिमय करना संचार कहलाता है। ड़ा० हरिमोहन-संचार एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच अर्थपूर्ण … Read more

हिंदी के विविध रूप-

हिंदी खड़ी बोलिसे आधुनिक मानक हिंदी का विकास हुआ है | खड़ी बोली का विकास 19 वीं शताब्दी में हुआ |सबसे पहले अमीर खुसरो ने हिंदी कड़ी बोली में रचना की जिसे निम्न दोहा दर्शाता है- गोरी सोये सेज पर, मुख पर डाले केश | चल खुसरू घर अपने, रेन भई चहूँ देश || मध्यकाल … Read more

हिंदी भाषा प्रयोग के विविध रूप

भारत के बहुसंख्यक लोगों की भाषा हिंदी है जो मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली,राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान , मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ , बिहार और झारखण्ड आदि | बोली- वह भाषिक संचार माध्यम जिसका प्रयोग सीमित जगह में किया जाता है, बोली कहलाती है | जैसे-भोजपुरी इत्यादि | इसी प्रकार हिंदी क्षेत्र में … Read more

आदिकाल का नामकरण व काल विभाजन

Leave a Comment / Educational / By sukhvinder787 आदिकाल (1050-1375)(महारोज भोज से लेकर हम्मीर देव से पीछे तक) इस काल के विभिन्न नाम साहित्यकार नामकरण समयावधि (ई०) टिप्पणी गिर्यसन चरण काल 7000-1300 मिश्र बंधु प्रारम्भिक काल 0700-1343 (1) 1344-1444 (2) पूर्व आरंभिक उत्तर आरम्भिक आचार्य शुक्ल वीर गाथा काल 1050-1375 12 ग्रंथों (विजयपाल रासो,खुम्माण रासो ,कीर्तिलता आदि) आधार पर … Read more

विजयपाल रासो

मिश्रबंधुओं ने अपने ग्रंथ “मिश्रबंधु विनोद” में इस ग्रंथ जा उल्लेख मिलता है।इसके रचयिता नल्हसिंह भाट माने जाते हैं।इसका रचनाकाल 1298 ई० माना जाता है। ड़ा० राजनाथ शर्मा के अनुसार इस कृति में विजय पाल सिंह ओर बंग राजा के युद्ध का वर्णन है। ड़ा० राजबली पाण्डेय के अनुसार इस रचना में रचनाकार ने राजा … Read more

हम्मीर रासो

यह अभी तक एक स्वतंत्र कृति के रूप में उपलब्ध नहीं हो सका है ।अपभ्रंश के “प्राकृत पैंगल” नामक संग्रह ग्रंथ में संगृहीत हम्मीर विषयक 8 छंदों को देख शुक्ल जी ने इसे एक स्वतंत्र ग्रंथ मान लिया था ।प्रचलित धारणा के अनुसार इसके रचयिता शारंगधर माने जाते हैं। परंतु कुछ पदों के आधार पर … Read more

परमाल रासो

इसे आल्हाखंड के नाम से भी जाना जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे बैलेड तथा ड़ा० राम कुमार वर्मा ने इसे वीरगाथा काव्य कहा है।कुछ विद्वान इसे “विकासशील लोककाव्य” कहते हैं ।जनता में अत्यधिक लोकप्रियता को देखते हुए गिर्यसन ने इसे वर्तमान युग का सबसे लोकप्रिय महाकाव्य माना है।लेकिन इसकी प्रामाणिकता अभी तक उपलब्ध … Read more

रासो- उत्पत्ति व अर्थ

हिंदी साहित्य के आरंभिक ग्रंथों के अंत में रासो शब्द जुड़ा हुआ है जो काव्य का पर्यायवाची है | रासो शब्द की उत्पत्ति के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों के मत- गार्सा द तासी -राजसूय यज्ञ से रामचंद्र शुक्ल ने- रसायण से ड़ा० मोतीलाल मेनरिया – रहस्य से श्री नरोत्तम स्वामी-रसिक से अन्य विद्वान- राउस-रासो या … Read more