Class 8 Sanskrit Chapter 2 :Hindi Translation– अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका

प्रस्तुत पाठ में यह बताया गया है कि किस प्रकार अल्प प्राणियों का समूह भी कार्य की सिद्धि कर लेता है। यह पाठ मूलरूपेण हितोपदेश से लिया गया है। कथा के अनुसार ग्रीष्मकाल के आवकाश में कुछ मित्र धार्मिक यात्रा पर निकल पड़ते हैं। वे केदारधाम की ओर बढ़ रहे थे। अचानक तेज वर्षा से … Read more

Class 8 Chapter 1 Sanskrit (New Book Deepakam)

अभ्यासात् जायते सिद्धिः (पृष्ठ 7–8) १. संज्ञानसूक्तं सस्वरं पठत स्मरत लिखत च । सञ्ज्ञानसूक्त का सस्वर पाठ करें, याद करें और लिखें। उत्तरम् : विद्यार्थी स्वयं करें। २. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत– (क) सर्वेषां मनः कीदृशं भवेत् ? (ख) सङ्गच्छध्वं संवदध्वम् इत्यस्य कः अभिप्रायः ? (ग) सर्वे किं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवेयुः ? (घ) अस्मिन् … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 8 संसारसागरस्य नायकाः

वे अज्ञात नाम वाले कौन थे? सैकड़ों व हजारों तालाब अचानक ही शून्य से प्रकट नहीं हुए हैं। ये तालाब ही यहाँ संसार सागर हैं। इनके आयोजन का पर्दे के पीछे बनाने वालों की इकाई और बनने वालों की दहाई थी। यह इकाई व दहाई गुणित होकर सौ तथा हजार की रचना करते थे। परन्तु … Read more

Class 8 Sanskrit Chapter 7 भारतजनताऽहम्

(क) अभिमानधना विनयोपेता, शालीना भारतजनताऽहम्। कुलिशादपि कठिना कुसुमादपि, सुकुमारा भारतजनताऽहम् ॥ अन्वयः- अहं भारतजनता अभिमानधना विनयोपेता शालीना कुलिशादपि कठोरा कुसुमादपि सुकुमारा (अस्मि)। शब्दार्थ- अभिमानधना-स्वाभिमान रूपी धन वाली। विनयोपेता-विनम्रता से परिपूर्ण। कुलिशादपि-वज्र से भी। कुसुमादपि-फूल से भी। सुकुमारा-अत्यधिक कोमल। सरलार्थ- मैं भारत की जनता हूँ।मैं स्वाभिमान रूपी धन वाली हूँ। मैं वज्र से भी कठोर हूँ। … Read more

पाठ 18 टोपी

प्र० 1. गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?उत्तर- गवरइया और गवरा के बीच आदमी के वस्त्र पहनने को लेकर बहस हुई। गवरइया वस्त्र पहनने के पक्ष में थी तथा गवरा विपक्ष में था। गवरइया को आदमी द्वारा रंग-बिरंगे कपड़े पहनना … Read more

पाठ 17 बाज और साँप

प्र० 1.घायल होने के बाद भी बाज ने यह क्यों कहा, ”मुझे कोई शिकायत नहीं है।” विचार प्रकट कीजिए।उत्तर-घायल होने के बाद भी बाज ने यह कहा कि – “मुझे कोई शिकायत नहीं है।” उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह किसी भी कीमत पर समझौतावादी जीवन शैली पसंद नहीं करता था। वह अपने अधिकारों के … Read more

पाठ 16 पानी की कहानी

प्र० 1. लेखक को ओस की बूँद कहाँ मिली?उत्तर– लेखक को बेर की झाड़ी पर ओस की बूँद मिली। प्र० 2. ओस की बूँद क्रोध और घृणा से क्यों काँप उठी?उत्तर- पेड़ों की जड़ों में निकले रोएँ द्वारा जल की बूँदों को बलपूर्वक धरती के भूगर्भ से खींच लाना व उनको खा जाना याद करते … Read more

पाठ 15 सूरदास के पद

प्र० 1. बालक श्रीकृष्ण किस लोभ के कारण दूध पीने के लिए तैयार हुए?उत्तर- माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को बताया की दूध पीने से उनकी चोटी बलराम भैया की तरह हो जाएगी। श्रीकृष्ण अपनी चोटी बलराम जी की चोटी की तरह मोटी और बड़ी करना चाहते थे इस लोभ के कारण वे दूध पीने के … Read more

पाठ 14 अकबरी लोटा

प्र०1 “लाला ने लोटा ले लिया, बोले कुछ नहीं, अपनी पत्नी का अदब मानते थे।”लाला झाऊलाल को बेढंगा लोटा बिलकुल पसंद नहीं था। फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया। आपके विचार से वे चुप क्यों रहे? अपने विचार लिखिए।उत्तर-लाला झाऊलाल को बेढंगा लोटा बिलकुल पसंद नहीं था। फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया … Read more

पाठ 13 जहाँ पहिया हैं

प्र०1 “…उन जंजीरों को तोड़ने का जिनमें वे जकड़े हुए हैं, कोई-न-कोई तरीका लोग निकाल ही लेते है..”आपके विचार से लेखक ‘जंजीरों’ द्वारा किन समस्याओं की ओर इशारा कर रहा है?उत्तर-लेखक जंजीरों द्वारा रूढ़िवादी प्रथाओं की ओर इशारा कर रहा है। प्र०2 “…उन जंजीरों को तोड़ने का जिनमें वे जकडे हुए हैं, कोई-न-कोई तरीका लोग … Read more