इसे स्वीकार करो (कविता)
प्रेम से इसे स्वीकार करो जो लाया हूँ भेट करो स्वीकार प्रिय ! अब न तुम तुम हो न मैं मैं हूँ हम दोनों हैं एक प्रिय सूना-२ सा दिन बेचैन है रात प्रिय भँवरे ऐसे गुम -सुम हैं जैसे अमावस्या का चाँद प्रिय कब तक ऐसे चुप बैठोगी? कब तोड़ोगी रार प्रिय मैं तो … Read more