दो सखियों की बातचीत

क्यूँ री सखी क्या तू इस किताब व् उंगुलीवाले भीम को जानती है या तू भी मेरी तरह इस भीम को महाभारतवाला भीम ही मानती है पर समझ नहीं आता ये कौन सा भीम है जो हमेशा सूठ-बूट में सजा है मैंने महाभारत वाले भीम के हाथ में तो देखा हमेशा गदा है ये जो … Read more

मैं

मैं हूं तो कुछ नहीं है सामने, मै नहीं तो सारा संसार नजर आता हैमै हूँ तो मै ही हूँ मै के नीचे सब कुछ दब जाता हैमै का मान करते करते मै मै का अहसास तब हुआएक दिन जब मै मै के बोझ के नीचे दब गयामै वो बादल का टुकडा जो अहंकार के … Read more

महिला उत्थान में एक पहल “

महिला को कभी भी कम समझने की मत करना कोई भूल, समय आने पर अपने परिवार की लिए उठा लेगी त्रिशूल l नारी को मिलना चाहिए जीवन में उसको उसका संमान, उसे भी अधिकार है कि पूरे हो जाए अपने सारे अरमान l घर में खुश यदि नारी है तो समझो पूरा खुश होगा ये … Read more

कवितायेँ

तबादला नीति बनी जी का जंजाल, वर्तमान में बिगड़ता गृहस्थ जीवन, महिला उत्थान में एक पहल- प्रवीण कुमार सिसवाल मैं, दो सखियाँ, ओ माँ , छड्ड दिला वो बचपन , बुजुर्गों की आँखें  मुर्दों के संसार में,  आज को जो दौर,  Facebook और Whatsapp,  शिक्षक,  हारती जिंदगियों, फेसबुक, मातृभाषा , स्थानांतरण   -सुखविन्द्र   

वर्तमान में बिगड़ता गृहस्थ जीवन”

एक दूसरे का ख्याल छोड़कर दिन- रात खो गए ऐसे, मानो उन पर असर कर गया हो कोई किसी का मन्त्र l अब तो आपस की बातों में भी दिलचस्पी कम हो रही है, जब से पुस्तक छोड़कर हाथों में आ गया दूरसंचार यन्त्र l घर में कोई भी रिश्तेदार आए या चाहे कोई भी … Read more

” तबादला नीति बनी जी का जंजाल”

चुनाव से ठीक पहले सरकार की एक बात समझ नहीं आई अध्यापकों के लिए मध्य सत्र में ही तबादला नीति चलवाई l सरकार का ये  मानना है कि हमने पूर्ण पारदर्शिता अपनाई, फिर सिफारिश से प्रतिनियुक्ति कर के बड़ी जल्दी दिखाई l महिला-पुरुष में ये दस अंकों का भारी अंतर कैसे होगा पार इस तबादला … Read more

रीतिकालीन आचार्यों का आचार्यत्व

संस्कृत के उत्तरकालीन ग्रंथों में आचार्यों को तीन श्रेणियों निर्धारित की गई है, जिनका वर्णन इस प्रकार है- उद्भावक आचार्य-इसके अंतर्गत उन विद्वानों को रखा गया है जिन्होंने किसी सिद्धांत की उद्भावना की अथवा विवेचना की। जैसे आचार्य वामन, आचार्य अभिनव गुप्त आदि। व्याख्याता आचार्य-इसके अंतर्गत वे आचार्य आते हैं जिन्होंने नवीन सिद्धांतों का अनुसंधान … Read more

रीतिकाल का वर्गीकरण,प्रमुख प्रवृत्तियाँ

रीतिकाल का वर्गीकरण रीति के आधार बना कर इस प्रकार किया जा सकता है- रीतिबद्ध रीतिमुक्त रीतिसिद्ध रीतिबद्ध-रीति के बंधन में बंधे हुए हैं अर्थात जिन्होंने रीति ग्रंथों की रचना की।लक्षण ग्रंथ लिखने वाले इन कवियों में प्रमुख है-चिंतामणि, मतिराम, देव, जसवंत सिंह, कुलपति मिश्र मंडल, सुरति मिश्र, सोमनाथ, भिखारी दास, दुलह, रघुनाथ, रसिकगोविंद, प्रताप … Read more

सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

राजनीतिक परिस्थिति– राजनीतिक दृष्टि से यह काल मुगलों के शासन की वैभव की चरमोत्कर्ष और उसके बाद उत्तर काल में ह्रास, पतन और विनाश का काल था।शाहजहाँ के शासनकाल में मुगल वैभव अपनी चरमसीमा पर था।राजदरबारों में वैभव, भव्यता और अलंकरण प्रमुख था।राजा और सामन्त मनोरंजन के लिए गुणीजनों कवियों और कलाकारों को आश्रय देते … Read more

रीतिकाल का अर्थ और नामकरण

रीतिका अर्थ पद्धति, शैली और काव्यांग निरुपण से है।साहित्य को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है-प्राचीन काल, मध्यकाल और आधुनिक काल। फिर पुन मध्यकाल को दो भागों में बांटा गया है- पूर्व मध्यकाल (भक्ति काल) उत्तर मध्यकाल (रीतिकाल) | 1643 विषय 1843 वीं तक के कालखंड को रीतिकाल कहा गया है। नामकरण अलंकृत … Read more