फेसबुक(facebook.)

फेसबुक पर आई दोस्तों की बहार है कुछ जाने पहचाने कुछ अनजाने चेहरों की बहार है कुछ से सिखने को मिलता है बहुत कुछ कुछ के पास चंद फोटो और शेयर इट का जुगाड़ है कुछ रच रहे हैं इतिहास ज्ञान के संग्रह का कुछ अकेले ही पड़े सूखे पत्तों से निराश हैं किसी ग्रुप … Read more

हारती जिंदगियो

हारती जिंदगीयो और जीतती मौत को देखकर मन मे ऐसे कुछ विचार आ रहे हैं क्यों अतिथि अध्यापक मौत को गले लगा रहे है क्यो किसान गले मे फंदा लगा रहे है क्यो हर तरफ टूटती चूड़िया बिलखते परिवार नजर आ रहे है क्यो बेकसूर मासूम यतीम होते जा रहे है क्यों खिलते चमन रूपी … Read more

शिक्षक (Teacher)

कुछ शिक्षक वो हैं जो इस अपनी ताकत स्कूलों मे लगा रहे है कुछ शिक्षक वो हैं जो ठाठ से मौज उड़ा रहे है कुछ शिक्षक वो हैं जो अपनी ऊर्जा मासूमों पर लुटा रहे है कुछ शिक्षक वो हैं जो सिर्फ कोरी बातो से काम चला रहे है कुछ शिक्षक वो हैं जो जी … Read more

Facebook और Whatsapp के जमाने में

Facebook और Whatsup के जमाने में लोग लगे हैं अपनी अपनी setting बैठाने में किसी को status से किसी को posts से प्यार है कोई डूबा है शेरो शायरी मे किसी को कविताओं का खुमार है किसी को pose मारने से फुर्सत नही किसी पर selfie का चढ़ा बुखार है कोई करता रहता है गिनती … Read more

आज का जो दौर

आज का जो दौर है लोग बिक रहे हर और हैं कहीं चीखें कहीं किलकारियां कहीं वाहनों का शोर है हर किसी को सिर्फ अपने स्वार्थ की प्रतिपूर्ति की अपेक्षा है निस्वार्थियों को टोलियाँ जा रहीं किस और हैं कहीं आते जीवन की सुबह कहीं मौत के अँधेरे का छोर है कहीं जात पात कहीं … Read more

मुर्दों के इस संसार में

मुर्दों के इस संसार में मुर्दों के संसार में इंसान बिकते सरे बाजार देखे कुछ सिर्फ देखने में ज़िंदा थे कुछ ज़िंदा मुर्दे देखे कुछ देखे मतवाले कुछ दीवाने देखे कुछ देखे सज्जन कुछ ढोंगीपन के बेताज बादशाह देखे देखि कहीं सच्चाई कहीं बहते झूठ के दरिया देखे कहीं लहू लुहान रिश्तों के धागे देखे … Read more

बुजुर्गों की आँखें

बुजुर्गों की आँखें क्या कहती हैं जब देखी खामोश आँखें बुजुएगों की कुछ कहना कुछ बताना चाहती हो जैसे कुछ जानना कुछ जताना चाहती हों जैसे एक कातरता एक ठहराव कभी सागर सी गहराई दिखाई देती है जैसे उन आँखों में जीवन की हर सच्चाई दिखती है जैसे लगता है कुछ कह रही हैं अपने … Read more

वो बचपन

वो बचपन याद बहुत आता है वो सुहानी यादें फिर बटोर लाता है वो बचपन था जन्नत का बसेरा ना कुछ तेरा था ना कुछ मेरा उस जमाने सब हमारा था वो बहनों भाइयों का प्यार भी न्यारा था न चालाकी ना हेरा फेरी थी ना होशियारी ना गद्दारी थी हर रिश्ते में एक वफादारी … Read more

छड्ड दिला

छड्ड दिला दुनिया नु इदा ता सर ही जाणा किन्ने तैनू पूछना जे तू मर वि जाणा तेरी कि औकात वे निमाणया इत्थे ते बड्डे बड्डे कर सके ना ठिकाणा ……………………… सर ही जाणा किन्नू कु तेरी फिकर डून्गा सोच के वेख ले एक बारी सब कुछ छड के ता वेख ले ना किसे ने … Read more

ओ मां

ओ मां ये रीत किसने और क्यों बनाई है ? एक ही पल में बेटी क्यों हो जाती पराई है जिसने अपना बचपन तेरे आंचल और बाप की छाया में बिताया जिसने भगवान् को आप दोनों में ही है पाया उस अभागी बेटी ने ये कैसी किस्मत पाई है …………………………………………………एक ही पल में बेटी क्यों … Read more