Class 9 Sanskrit Chapter 5 सूक्तिमौक्तिकम्

1. वृत्तं यत्नेन संरक्षेद् वित्तमेति च याति च। अक्षीणो वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतो हतः॥ -मनुस्मृतिः शब्दार्थाः- वित्तम् – धन, ऐश्वर्य, वृत्तम् – आचरण, चरित्र अक्षीणः – नष्ट नहीं होता क्षीणः – नष्ट होना वृत्ततः – आचरण से हतः – नष्ट हो जाना एति – आता है याति – जाता है संरक्षेत् – रक्षा करनी चाहिए … Read more

Class 9 Sanskrit Chapter 3 गोदोहनम्

(पहला दृश्य) (मल्लिका लड्डुओं को बनाती हुई धीमी आवाज़ में शिव की स्तुति करती है।) (उसके बाद लड्डुओं की सुगन्ध को अनुभव करते हुए प्रसन्न मन से चन्दन प्रवेश करता है।) चन्दन – वाह! सुगन्ध तो मनोहारी है (देखकर) अरे लड्डू बनाए जा रहे हैं? (प्रसन्न होकर) तो स्वाद लेता हूँ। (लड्डू को लेना चाहता … Read more

Class 9 Sanskrit Chapter 2 स्वर्णकाकः

प्राचीन समय में किसी गाँव में एक निर्धन (ग़रीब) बुढ़िया स्त्री रहती थी। उसकी एक नम्र स्वभाव वाली और सुंदर बेटी थी। एक बार माँ ने थाली में चावलों को रखकर पुत्री को आज्ञा दी – सूर्य की गर्मी में चावलों की पक्षियों से रक्षा करो। कुछ समय बाद एक विचित्र कौआ उड़कर वहाँ आया। … Read more

Class 9 Sanskrit Chapter 1 भारतीवसन्तगीतिः

1. निनादय नवीनामये वाणि! वीणाम् मृदुं गाय गीति ललित-नीति-लीनाम्। मधुर-मञ्जरी-पिञ्जरी-भूत-माला: वसन्ते लसन्तीह सरसा रसालाः कलापाः ललित-कोकिला-काकलीनाम्॥ निनादय… ॥ शब्दार्था: – नवीनामये – सुंदर मुखवाली वाणि – हे सरस्वती वीणाम् – वाणी को गाय – गाओ, गीतिम्-गीत को मधुर – मीठी (मीठे) काकलीनाम् – कोयल के स्वरों की। अर्थ – हे सरस्वती (वाणी) आप अपनी नवीन … Read more