Class 10 Sanskrit Chapter 5 जननी तुल्यवत्सला

कोई किसान बैलों से खेत जोत रहा था। उन बैलों में एक (बैल) शरीर से कमज़ोर और तेज़ी से चलने में असमर्थ (अशक्त) था। अतः किसान उस दुबले बैल को कष्ट देते हुए (ज़बरदस्ती) हाँकने लगा। वह बैल हल को उठाकर चलने में असमर्थ होकर खेत में गिर पड़ा। क्रोधित किसान ने उसको उठाने के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 4 शिशुलालनम्

(श्रीराम सिंहासन पर बैठे हैं। उसके बाद विदूषक से उपदेश दिए जाते हुए (बातचीत करते हुए) तपस्वी कुश और लव प्रवेश करते हैं।) विदूषक – हे आर्य! इधर से-इधर से। कुश-लव – (राम के पास जाकर और प्रणाम करके) क्या महाराजा की कुशलता है? राम – तुम्हारे दर्शन से कुशल जैसा हूँ। क्या दोनों के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 3 व्यायामः सर्वदा पथ्यः

1. शरीरायासजननं कर्म व्यायामसंज्ञितम्। तत्कृत्वा तु सुखं देह विमृद्नीयात् समनततः ॥1॥ शब्दार्थाः शरीर – शरीर (के)। आयासजननम् – परिश्रम से प्राप्त (उत्पन्न)। व्यायामसंज्ञितम् – व्यायाम नाम वाला। देहम् – देह का। विमृद्नीयात् – मालिश करनी चाहिए। समन्ततः – एक ओर से। हिंदी अनुवाद शरीर के परिश्रम का काम व्यायाम नाम वाला होता है। उसे करके … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 2 बुद्धिर्बलवती सदा

देउल नाम का गाँव था। वहाँ राजसिंह नाम का राजपुत्र रहता था। एक बार किसी जरूरी काम से उसकी पत्नी बुद्धिमती दोनों पुत्रों के साथ पिता के घर की तरफ चली गई। रास्ते में घने जंगल में उसने एक बाघ को देखा। बाघ को आता हुआ देखकर उसने धृष्टता से दोनों पुत्रों को एक-एक थप्पड़ … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 1 शुचिपर्यावरणम्

1. दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम्। शुचि-पर्यावरणम्॥ महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्। मनः शोषयत् तनुः पेषयद् भ्रमति सदा वक्रम्॥ दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव जननसनम्। शुचि… ॥1॥ शब्दार्थाः: दुर्वहम् – कठिन। जीवितम् – जीवन। जातम् – हो गया है। शुचिः – पवित्र शुद्ध। महानगरमध्ये – महानगरों के बीच में। चलत् – चलते हुए। कालायसचक्रम् – काला लोहे का पहिया। अनिशम् … Read more