Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 2 बुद्धिर्बलवती सदा

प्रश्न 1.एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) बुद्धिमती कुत्र व्याघ्र ददर्श? उत्तराणि:गहनकानने (ख) भामिनी कया विमुक्ता? उत्तराणि:निजबुद्ध्या (ग) सर्वदा सर्वकार्येषु का बलवती? उत्तराणि:बुद्धिः (घ) व्याघ्रः कस्मात् बिभोति? उत्तराणि:मानुषात् (ङ) प्रत्युपन्नमतिः बुद्धिमती किम् आक्षिपन्ती उवाच? उत्तराणि:शृगालम् प्रश्न 2.अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) बुद्धिमती केन उपेता पितुहं प्रति चलिता? उत्तराणि:बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता पितृर्गह प्रति चलिता। (ख) व्याघ्रः किं विचार्य … Read more

Class 10 Sanskrit Shemushi Chapter 1 शुचिपर्यावरणम्

प्रश्न 1.एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) अत्र जीवितं कीदृशं जातम्? उत्तराणि:दुर्वहमत्र (ख) अनिशं महानगरमध्ये किं प्रचलति? उत्तराणि:कालायासचक्रम् (ग) कुत्सितवस्तुमिश्रितं किमस्ति? उत्तराणि:भक्ष्यम् (घ) अहं कस्मै जीवनं कामये? उत्तराणि:मानवाय (ङ) केषां माला रमणीया? उत्तराणि:ललितलतानां प्रश्न 2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) कविः किमर्थं प्रकृतेः शरणम् इच्छति? उत्तराणि:कविः सुजीवनार्थं प्रकृतेः शरणम् इच्छति। (ख) कस्मात् कारणात् महानगरेषु संसरणं कठिनं … Read more

Class 10 Sanskrit Shemushi शेमुषी भाग 2

पाठ-1 शुचिपर्यावरणम् अभ्यास  पाठ-2 बुद्धिर्बलवती सदा अभ्यास पाठ-3 व्यायामः सर्वदा पथ्यः अभ्यास पाठ-4 शिशुलालनम् अभ्यास पाठ-5 जननी तुल्यवत्सला अभ्यास पाठ-6 सुभाषितानि अभ्यास पाठ-7 सौहार्दं प्रकृतेः शोभा अभ्यास पाठ-8 विचित्रः साक्षी अभ्यास पाठ-9 सूक्तयः अभ्यास पाठ-10 भूकंपविभीषिका अभ्यास पाठ-11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद् अभ्यास पाठ-12 अनयोक्त्यः अभ्यास

Class 10 Sanskrit Chapter 12 अनयोक्त्यः

1. एकेन राजहंसेन या शोभा सरसो भवेत्। न सा बकसहस्रेण परितस्तीरवासिना।। शब्दार्थाः सरसः – तालाब (नदी) की। भवेत् – हो/होती है। बकसहस्रेण – हज़ारों बगुलों से। परितः – चारों ओर। तीरवासिना – किनारे पर रहने वाले। हिन्दी अनुवाद एक राजहंस से जो शोभा तालाब (नदी) की होती है। वह शोभा किनारों पर चारों ओर रहने … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 11 प्राणेभ्योऽपि प्रियः सुह्रद्

चाणक्य – बेटा (प्रिय)। जौहरी सेठ चन्दनदास को इस समय देखना (मिलना) चाहता हूँ। शिष्य – ठीक है (वैसा ही हो) (निकलकर चन्दनदास के साथ प्रवेश करके) इधर-से-इधर से श्रेष्ठी (सेठ जी)! (दोनों घूमत है) शिष्य – (पास जाकर) आचार्य जी! यह सेठ चन्दनदास है। चन्दनदास – आर्य की विजय हो चाणक्य – सेठ! तुम्हारा … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 10 भूकंपविभीषिका

सन् दो हजार एक के साल (26 जनवरी 2001 ई०) गणतन्त्र-दिवस-पर्व पर जब सारा भारत देश नाचने-गाने और बजाने की खुशी में मग्न था तब अचानक ही गुजरात राज्य चारों ओर से व्याकुल, अस्त-व्यस्त, रोने-चिल्लाने से दु:खी और मुसीबत में फँस गया। भूकम्प की भयानक मुसीबत ने सम्पूर्ण गुजरात क्षेत्र को विशेषकर कच्छ जिले को … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 9 सूक्तयः

1. पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्। पिताऽस्य किं तपस्तेपे इत्युक्तिस्तत्कृतज्ञता॥1॥ शब्दार्थाः बाल्ये – (बाल्ये वयसि)-बचपन में। महत् – (बृहत्)-बड़ा। उक्तिः – (कथनम्)-कथन। हिंदी अनुवाद पिता पुत्र को बचपन में विद्यारूपी बहुत बड़ा धन देता है। इससे पिता ने क्या तप किया? यह कथन ही उसकी कृतज्ञता है। 2. अवक्रता यथा चित्ते तथा वाचि भवेद् … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 8 विचित्रः साक्षी

किसी ग़रीब आदमी ने जब खूब परिश्रम (मेहनत) करके कुछ धन कमाया। उस धन से (वह) अपने पुत्र को एक महाविद्यालय (कॉलेज) में प्रवेश दिलाने में सफल हो गया। उसका पुत्र वहीं छात्रावास में निवास करते हुए पढ़ाई में जुट गया। एक बार वह पिता बेटे की बीमारी को सुनकर व्याकुल हो गया और पुत्र … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 7 सौहार्दं प्रकृतेः शोभा

(वन का दृश्य। पास में ही एक नदी बह रही है।) एक शेर सुख से विश्राम कर रहा है तभी एक बन्दर आकर उसकी पूँछ को पकड़कर घुमा देता है। क्रोधित शेर उस पर प्रहार करना चाहता है, परन्तु बन्दर कूदकर पेड़ पर चढ़ जाता है। तभी दूसरे पेड़ पर से दूसरा बन्दर शेर के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 6 सुभाषितानि

1. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥1॥ शब्दार्थाः आलस्यम् – आलस्य। हि-निश्चय से। मनुष्याणां – मनुष्यों के (को)। शरीरस्थः – शरीर में रहने वाला। रिपुः – शत्रु (है)। अद्यमसमः – परिश्रम के समान। बन्धुः – मित्र (भाई/सखा)। नास्ति – नहीं है।। सम् – जिसे, जिसको। कृत्वा – करके। अवसीदति-दुखी … Read more