Class 10 Sanskrit Chapter 10 भूकंपविभीषिका

सन् दो हजार एक के साल (26 जनवरी 2001 ई०) गणतन्त्र-दिवस-पर्व पर जब सारा भारत देश नाचने-गाने और बजाने की खुशी में मग्न था तब अचानक ही गुजरात राज्य चारों ओर से व्याकुल, अस्त-व्यस्त, रोने-चिल्लाने से दु:खी और मुसीबत में फँस गया। भूकम्प की भयानक मुसीबत ने सम्पूर्ण गुजरात क्षेत्र को विशेषकर कच्छ जिले को … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 9 सूक्तयः

1. पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्। पिताऽस्य किं तपस्तेपे इत्युक्तिस्तत्कृतज्ञता॥1॥ शब्दार्थाः बाल्ये – (बाल्ये वयसि)-बचपन में। महत् – (बृहत्)-बड़ा। उक्तिः – (कथनम्)-कथन। हिंदी अनुवाद पिता पुत्र को बचपन में विद्यारूपी बहुत बड़ा धन देता है। इससे पिता ने क्या तप किया? यह कथन ही उसकी कृतज्ञता है। 2. अवक्रता यथा चित्ते तथा वाचि भवेद् … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 8 विचित्रः साक्षी

किसी ग़रीब आदमी ने जब खूब परिश्रम (मेहनत) करके कुछ धन कमाया। उस धन से (वह) अपने पुत्र को एक महाविद्यालय (कॉलेज) में प्रवेश दिलाने में सफल हो गया। उसका पुत्र वहीं छात्रावास में निवास करते हुए पढ़ाई में जुट गया। एक बार वह पिता बेटे की बीमारी को सुनकर व्याकुल हो गया और पुत्र … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 7 सौहार्दं प्रकृतेः शोभा

(वन का दृश्य। पास में ही एक नदी बह रही है।) एक शेर सुख से विश्राम कर रहा है तभी एक बन्दर आकर उसकी पूँछ को पकड़कर घुमा देता है। क्रोधित शेर उस पर प्रहार करना चाहता है, परन्तु बन्दर कूदकर पेड़ पर चढ़ जाता है। तभी दूसरे पेड़ पर से दूसरा बन्दर शेर के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 6 सुभाषितानि

1. आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति ॥1॥ शब्दार्थाः आलस्यम् – आलस्य। हि-निश्चय से। मनुष्याणां – मनुष्यों के (को)। शरीरस्थः – शरीर में रहने वाला। रिपुः – शत्रु (है)। अद्यमसमः – परिश्रम के समान। बन्धुः – मित्र (भाई/सखा)। नास्ति – नहीं है।। सम् – जिसे, जिसको। कृत्वा – करके। अवसीदति-दुखी … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 5 जननी तुल्यवत्सला

कोई किसान बैलों से खेत जोत रहा था। उन बैलों में एक (बैल) शरीर से कमज़ोर और तेज़ी से चलने में असमर्थ (अशक्त) था। अतः किसान उस दुबले बैल को कष्ट देते हुए (ज़बरदस्ती) हाँकने लगा। वह बैल हल को उठाकर चलने में असमर्थ होकर खेत में गिर पड़ा। क्रोधित किसान ने उसको उठाने के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 4 शिशुलालनम्

(श्रीराम सिंहासन पर बैठे हैं। उसके बाद विदूषक से उपदेश दिए जाते हुए (बातचीत करते हुए) तपस्वी कुश और लव प्रवेश करते हैं।) विदूषक – हे आर्य! इधर से-इधर से। कुश-लव – (राम के पास जाकर और प्रणाम करके) क्या महाराजा की कुशलता है? राम – तुम्हारे दर्शन से कुशल जैसा हूँ। क्या दोनों के … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 3 व्यायामः सर्वदा पथ्यः

1. शरीरायासजननं कर्म व्यायामसंज्ञितम्। तत्कृत्वा तु सुखं देह विमृद्नीयात् समनततः ॥1॥ शब्दार्थाः शरीर – शरीर (के)। आयासजननम् – परिश्रम से प्राप्त (उत्पन्न)। व्यायामसंज्ञितम् – व्यायाम नाम वाला। देहम् – देह का। विमृद्नीयात् – मालिश करनी चाहिए। समन्ततः – एक ओर से। हिंदी अनुवाद शरीर के परिश्रम का काम व्यायाम नाम वाला होता है। उसे करके … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 2 बुद्धिर्बलवती सदा

देउल नाम का गाँव था। वहाँ राजसिंह नाम का राजपुत्र रहता था। एक बार किसी जरूरी काम से उसकी पत्नी बुद्धिमती दोनों पुत्रों के साथ पिता के घर की तरफ चली गई। रास्ते में घने जंगल में उसने एक बाघ को देखा। बाघ को आता हुआ देखकर उसने धृष्टता से दोनों पुत्रों को एक-एक थप्पड़ … Read more

Class 10 Sanskrit Chapter 1 शुचिपर्यावरणम्

1. दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम्। शुचि-पर्यावरणम्॥ महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्। मनः शोषयत् तनुः पेषयद् भ्रमति सदा वक्रम्॥ दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव जननसनम्। शुचि… ॥1॥ शब्दार्थाः: दुर्वहम् – कठिन। जीवितम् – जीवन। जातम् – हो गया है। शुचिः – पवित्र शुद्ध। महानगरमध्ये – महानगरों के बीच में। चलत् – चलते हुए। कालायसचक्रम् – काला लोहे का पहिया। अनिशम् … Read more