Hindi Literature

श्लेष अलंकार

श्लेष अलंकार की परिभाषा श्लेष का अर्थ होता है चिपका हुआ या मिला हुआ।  जब एक ही शब्द से हमें विभिन्न अर्थ मिलते हों तो उस समय श्लेष अलंकार होता है। यानी जब किसी शब्द का प्रयोग एक बार ही किया जाता है लेकिन उससे अर्थ कई निकलते हैं तो वह श्लेष अलंकार कहलाता है। […]

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यमक अलंकार

यमक अलंकार की परिभाषा जिस काव्य में समान शब्द के अलग-अलग अर्थों में आवृत्ति हो, वहाँ यमक अलंकार होता है। यानी जहाँ एक ही शब्द जितनी बार आए उतने ही अलग-अलग अर्थ दे। जैसे– कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय। या खाए बौरात नर या पाए बौराय।। इस पद्य में ‘कनक’ शब्द का प्रयोग दो

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राही मासूम रज़ा

राही मासूम रज़ा (1 सितंबर, 1925-15 मार्च 1992) का जन्म गाजीपुर जिले के गंगौली गांव में हुआ था और प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गंगा किनारे गाजीपुर शहर के एक मुहल्ले में हुई थी। राही की प्रारम्भिक शिक्षा ग़ाज़ीपुर में हुई, बचपन में पैर में पोलियो हो जाने के कारण उनकी पढ़ाई कुछ सालों के लिए छूट गयी,

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मन्नु भंडारी

लेखक का नाम मन्नू भंडारी जन्म तिथि 3 अप्रैल 1931 जन्म स्थान गाँव :  भानपुरा, राज्य : मध्यप्रदेश , देश : भारत पिता का नाम सुखसम्पत राय माता का नाम अनूप कुमारी पति का नाम राजेन्द्र यादव पुत्री का नाम रचना बहनें शुशीला, स्नेहलता भाई प्रसन्न कुमार, बसन्त कुमार मन्नू भंडारी जन्म: 3 अप्रॅल, 1931 हिंदी

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कृष्णा सोबती

नाम कृष्णा सोबती जन्म 18 फरवरी 1925 ई० जन्म स्थान गुजरात ( अब पाकिस्तान में ) मृत्यु 25 जनवरी 2019 राष्ट्रीयता भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार 2017 साहित्य अकादमी पुरस्कार ज़िन्दगीनामा(1980) हिंदी कथा साहित्य में कृष्णा सोबती की विशिष्ट पहचान है. वह कहती है की “कम लिखना और विशिष्ट लिखना” यही कारण है उनके संयमित लेखन और

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भीष्म साहनी

पूरा नाम भीष्म साहनी जन्म 8 अगस्त, 1915 ई. जन्म स्थान रावलपिंडी माता पिता पिता- हरबंस लाल साहनी, माता- लक्ष्मी देवी मृत्यु 11 जुलाई, 2003 यादगार कृतियाँ ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’, ‘झरोखे’, ‘तमस’, ‘बसन्ती’, ‘मायादास की माड़ी’, ‘हानुस’, ‘कबीरा खड़ा बाज़ार में’, ‘भाग्य रेखा’, ‘पहला पाठ’, ‘भटकती राख’ आदि। श्री भीष्म साहनी का जन्म 1915 में

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क्रोचे का अभिव्यंजनावाद

अभिव्यंजनावाद का प्रारम्भ पाश्चात्य देशों में हुआ है। शैली को प्रभावित प्रदान करने वाले यूरोप में दो वाद प्रचलित हुए-एक तो अभिव्यंजनावाद और दूसरा कलावाद। अभिव्यंजना को महत्त्व प्रदान करने वालों में वेन्देतो क्रोचे का नाम आता है। डा. गोविन्द त्रिगुणायत ने यह प्रमाणित किया है कि अभिव्यंजनावाद का बीजारोपण पाश्चात्य देशों में हुआ। उन्होंने

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भारतेन्दु- भारत दुर्दशा-यथार्थ बोध।

भारत दुर्दशा नाटक नाटक  नाटककार: भारतेंदु हरिश्चंद्र प्रकाशन:  1880ई o  प्रकार:  एक नाट्यरासक  शैली: प्रतीकात्मक व्यंग्यात्मक कुल अंक: 6 विशेषता: यह नाटक भारत की तत्कालीन यथार्थ दशा से परिचित कराता है विषय: हिंदी का पहला राजनैतिक नाटक के पात्र नाटक के पात्र भारत दुर्दैव : देश के  विनाश का मूल आधार, किस्तानी आधा मुसलमानी  वेशधारी भारत:

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फणीश्वर नाथ ‘रेणु’

फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के अररिया जिले में फॉरबिसगंज के पास औराही हिंगना नामक गांव में हुआ था। उस समय वह पूर्णिया जिले में था। लेकिन अब यह अररिया जिले में पड़ता है। फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की शिक्षा भारत और नेपाल में हुई थी। प्रारंभिक शिक्षा फारबिसगंज तथा अररिया में

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अमृतलाल नागर

जन्म अमृतलाल नागर जी का जन्म 17 अगस्त 1916 ई को गोकुलपुरा, आगरा में एक गुजराती ब्राह्मण परिवार में हुआ। आपके पिता का नाम राजाराम नागर था तथा उनकी माता  का नाम विद्यावती नागर था। आपके पितामह पं. शिवराम नागर 1895 से लखनऊ आकर बस गए थे। आपकी पढ़ाई हाईस्कूल तक ही हुई। उन्होंने 31 जनवरी

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