Hindi Literature
CBSE Class 8 Sanskrit Syllabus 2022-23
S.No. LESSON NAME 1 सुभाषितानि हिंदी अनुवाद अभ्यास 2 विलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता हिंदी अनुवाद. अभ्यास 3 डिजीभारतम् हिंदी अनुवाद अभ्यास 4 सदैव पुरतो निधेहि चरणम् हिंदी अनुवाद अभ्यास 5 कण्टकेनैव कण्टकम् हिंदी अनुवाद अभ्यास 6 गृहं शून्यं सुतां बिना हिंदी अनुवाद अभ्यास 7 भारतजनताडहम् हिंदी अनुवाद अभ्यास 8 संसारसागरस्य नायकाः हिंदी अनुवाद अभ्यास 9 सप्तमगिन्यः
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मातृभाषा
मातृभाषा दिवसमातृभाषा हमें है प्यारी ,लगती जैसे फूलों की क्यारीइस क्यारी के बनकर फूल हमने महकाई बगिया सारीबचपन से ही इसमें अब भाव व्यक्त किए हमनेसुख- दुःख के मीठे कड़वे नीर पिए हमनेभावों की अभिव्यक्ति का साधन इससे बेहतर न कोईमौलिक रचनात्मकता तो केवल मातृभाषा में ही होईमातृभाषा के इस दिवस पर मातृभाषा का सम्मान
Class 8 VASANT-3
पाठ 1 ध्वनि पाठ 2 लाख की चूड़ियाँ पाठ 3 बस की यात्रा पाठ 4 दीवानों की हस्ती पाठ 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ 6 भगवान के डाकिये पाठ 7 क्या निराश हुआ जाए पाठ 8 यह सबसे कठिन समय नहीं पाठ 9 कबीर की साखियाँ पाठ 10 कामचोर पाठ 11 जब सिनेमा ने
बिहारी लाल (BIHARI LAL)
नाम कविवर बिहारी पिता का नाम केशव राय जन्म सन् 1603 ईसवी जन्म-स्थान बसुआ-गोविंदपुर (ग्वालियर) भाषा-शैली भाषा – प्रौढ़ प्रांजल, परिष्कृत एवं परिमार्जित ब्रज प्रमुख रचनाएं बिहारी सतसई निधन सन् 1663 ई० साहित्य में स्थान अपनी काव्यगत (भावपक्ष व कलापक्ष) विशेषताओं के कारण हिंदी साहित्य में बिहारी का अद्वितीय स्थान है। जन्मकाल 1603 से 1663
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मतिराम
मतिराम रीति काल के मुख्य कवियों में से एक थे। वे चिंतामणि तथा भूषण के भाई परंपरा से प्रसिद्ध थे। मतिराम की रचना की सबसे बड़ी विशेषता है, उसकी सरलता और अत्यंत स्वाभाविकता। उसमें ना तो भावों की कृत्रिमता है और ना ही भाषा की। भाषा शब्दाडंबर से सर्वथा मुक्त है। भाषा के ही समान
विश्व हिंदी दिवस
आज कल की पीढ़ी अंग्रेजी भाषा को ज्यादा और हिंदी भाषा को कम महत्व देती है। हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है।पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए 2006 में प्रति वर्ष 10 जनवरी को हिन्दी दिवस मनाने की घोषणा की
कफ़न
कफ़न प्रेमचंद द्वारा रचित एक उत्कृष्ट और अंतिम कहानी है जो अप्रैल 1936 ई० में चाँद नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।मूल रूप से ये उर्दू में लिखी गई थी जो दिसंबर 1935 वीं में जामिया पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।यह कहानी दलित चेतना से ओतप्रोत एक वातावरण प्रधान सामाजिक कहानी है।कहानी के मूल
मुफ्त का यश
मुफ्त का यश मुन्शी प्रेमचंद द्वारा रचित है।यह अगस्त में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई है हुई थी।यह कहानी मनोविश्लेषणात्मक आधार पर रची गई व्यंग्यप्रधान कहानी है।कहानी का शीर्षक विषयवस्तु से संबद्ध तथा जिज्ञासावर्धक है।कहानी का नायक स्वयं लेखक हैं, जो वर्णात्मक शैली में लोगों के विचारों, भावनाओं और क्रियाकलापों की यथार्थ अभिव्यक्ति करता है।लेखक
दूध का दाम
मुन्शी प्रेमचंद द्वारा रचित चर्चित कहानी दूध का दाम जुलाई 1934 में हंस पत्रिका में प्रकाशित हुई।यह कहानी सामाजिक वैषम्य, वर्णाश्रम भेद, जात-पात, ऊँच-नीच, छुआछूत जैसी समस्याओं पर आधारित है। यह कहानी ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सकीय सुविधाओं की बदहाल अवस्था को भी इंगित करती है। गांव के अस्पतालों में अच्छे डॉक्टर, नर्सों के अभाव में