यह पाठ अण्डमान द्वीप समूह की प्राकृतिक सुन्दरता, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विविधता को वर्णित करता है। अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह भारत के आठ केन्द्रशासित प्रदेशों में से एक है। यह भारत का सबसे बड़ा द्वीप समूह है। यह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यहाँ पर बनी ‘सेल्युलर जेल’ आज भी ‘कालापानी’ की कहानियाँ सुनाती है। यहाँ बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे देशभक्तों को सज़ा दी गई। रामायण काल में इसका नाम हंडुकमान था। यहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं। यहाँ कई प्रकार की जनजातियाँ रहती हैं। यहाँ का मुख्य रोज़गार मत्स्य पालन है। यहाँ कई पर्यटन स्थल हैं, जिनमें मरीन पार्क, राधा नगर बीच इत्यादि प्रमुख हैं। ‘जन्माष्टमी’ यहाँ का प्रमुख त्योहार है ।
भारत में वर्तमान में आठ केन्द्रशासित प्रदेशों में से एक अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह है। यह भारत का सबसे बड़ा द्वीप समूह है। यह बंगाल की खाड़ी में स्थित है। यहाँ पर बनी ‘सेल्युलर जेल’ आज भी ‘कालापानी’ की कहानियाँ सुनाती है। यहाँ बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे देशभक्तों को सज़ा दी गई। रामायण काल में इसका नाम हंडुकमान था । यहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं । यहाँ कई प्रकार की जनजातियाँ रहती हैं। यहाँ का मुख्य रोजगार मत्स्य पालन है। यहाँ के कई पर्यटन स्थल हैं, जिसमें मरीन पार्क, राधा नगर बीच इत्यादि प्रमुख हैं। ‘जन्माष्टमी’ यहाँ का प्रमुख त्योहार है।
अध्यापिका – छात्राः! एतत् चित्रं पश्यन्तु । एतत् आकर्षकं खलु ?
छात्र: – आम् आचार्ये! बहु आकर्षकम् अस्ति।
अध्यापिका – एतत् स्थानं कुत्र अस्ति, भवन्तः जानन्ति किम् ?
छात्रा – नैव आचार्ये!
अध्यापिका – सावधानं पश्यन्तु । एतत् स्थानम् अस्माकं देशस्य कश्चन रमणीयः द्वीपः अस्ति । एतस्य विषये किञ्चित् अद्य
जानीमः ।
सरलार्थ-
अध्यापिका – बच्चो! इस चित्र को देखो। क्या यह मनोहर है ?
छात्र – हाँ, आचार्या! बहुत मनोहर है।
अध्यापिका – यह स्थान कहाँ है, आप सब जानते हैं क्या?
छात्रा – नहीं आचार्या!
अध्यापिका – ध्यान से देखो। यह स्थान हमारे देश का कोई सुन्दर द्वीप है। इसके विषय में आज कुछ जानते हैं।
(1)
अध्यापिका – (भारतस्य मानचित्रे अण्डमानद्वीपपुञ्जं दर्शयन्ती) एषः भारतस्य अष्टसु केन्द्रशासितप्रदेशेषु अन्यतमः अण्डमान- द्वीपसमूहः अस्ति। एतस्य राजधानी ‘ श्रीविजयपुरम् । पूर्वम् – आङ्ग्लशासनेन अस्य नाम ‘पोर्ट ब्लेयर्’ इति दत्तम् आसीत्।
सर्वे उत्साहिताः बालाः – महोदयें! वयम् एतस्य विषये किञ्चित् अधिकं ज्ञातुम् इच्छामः।
अध्यापिका – अस्तु । भोः सूर्यांश! भवान् किमपि वक्तुम् इच्छति? इति प्रतिभाति।
सूर्यांश: – सत्यं महोदये! ह्यः भवती एतस्य पाठस्य विषये सङ्केतं दत्तवती । तदा अहं गृहं गत्वा जालपुटे एतस्य अन्वेषणम् अकरवम्।
अध्यापिका – समीचीनं सूर्याश! भवान् किम् अन्विष्टवान् तत्र?
सूर्यांश: – महोदये! रामायणकाले अस्य द्वीपस्य नाम ‘हंडुकमान्’ आसीत् । एषः शब्दः प्रायः ‘हनूमान्’ इति शब्दस्य परिवर्तितं रूपम्। प्रथमशताब्द्याम् अस्य नाम ‘ अगादेमन्’ इति आसीत् । ततः परं ‘अङ्गादेमन् ‘ जातम् इति सर्वकारस्य आधिकारिक-जालपुटे अहं दृष्टवान्।
दीपेश: – अहो! अस्य नाम्नः इतिहास : अद्भुतः अस्ति । किन्नु खलु भारतस्य इतिहासे अस्य द्वीपस्य काचित् विशिष्टा भूमिका अस्ति?
अध्यापिका – आम्, महती भूमिका अस्ति अस्य द्वीपस्य ।
दीपा – कीदृशी भूमिका महोदये! कृपया सूचयतु ।
सरलार्थ-
अध्यापिका – (भारत के मानचित्र में अण्डमान द्वीप समूह को दिखाती हुई) यह भारत के आठों केन्द्रशासित प्रदेशों में अलग अण्डमान द्वीपसमूह है। इसकी राजधानी ‘ श्री विजयपुरम् ‘ है । अंग्रेजी शासन के द्वारा पहले इसका नाम ‘पोर्ट ब्लेयर’ दिया गया था।
सभी बच्चे उत्साहित होते हुए – महोदया! हम इस विषय में कुछ ज़्यादा जानना चाहते हैं ?
अध्यापिका – अच्छा! सूर्यांश ! आप कुछ कहना चाहते हैं? ऐसा लग रहा है।
सूर्यांश – सच में महोदया! कल आपने इस पाठ के विषय में संकेत दिया था। तब मैंने घर जाकर वेबसाइट पर इसका खोज किया।
अध्यापिका – अच्छा सूर्यांश! आपने वहाँ क्या खोजा?
सूर्यांश – अध्यापिका जी! रामायण के समय में इस द्वीप (टापू) का नाम ‘हंडुकमान्’ था। यह शब्द ‘हनूमान्’ शब्द का परिवर्तित रूप है। पहली शताब्दी में इसका नाम ‘ अंगादेमन’ हो गया, इसे मैंने सरकार के आधिकारिक वेबसाईट पर देखा।
दीपेश: – ओह! इसके नाम का इतिहास अद्भुत है। क्या भारत के इतिहास में इस द्वीप की कोई विशेष भूमिका है?
अध्यापिका – हाँ, इस द्वीप की बहुत बड़ी भूमिका है।
दीपा – कैसी भूमिका है महोदया ! कृपया बताएँ ।
(2)
अध्यापिका – अस्मिन् द्वीपे ‘सेल्युलर्’ इति कारागारम् अस्ति । अस्य कारागारस्य अपरं नाम ‘कालापानी’ इत्यपि अस्ति।
सुधीर: – (साश्चर्यम्) आचार्ये! अस्य कः अभिप्रायः?
सुरेखा – ‘कालापानी’ इति शब्दं श्रुत्वा एव भीतिः भवति ।
अध्यापिका – सत्यमेव। भारतस्य स्वातन्त्र्यार्थं युद्धरतानां क्रान्तिकारिणां दमनार्थं ब्रिटिशजनैः निर्मितं त्रितलात्मकम् एतत् कारागारम्। अत्रैव महान् देशभक्तः स्वातन्त्र्यवीरः सावरकर : मातृभूमेः रक्षणाय दश वर्षाणि यावत् कल्पनातीतं घोरं कष्टं सोढवान् ।
मुकुन्दः – अहो! धन्याः ते स्वातन्त्र्यवीराः । तेषां बलिदानेन एव वयं सुखेन जीवामः ।
सूर्याश: – आचार्ये! एतत् स्थानं ‘यूनेस्को’ – संस्थायाः वैश्विकसम्पदः सूच्याम् अपि संरक्षितम्।
ऋचा – महोदये! किम् अस्मिन् द्वीपे जनाः अपि निवसन्ति?
अध्यापिका – आम्, तत्र काश्चन अण्डमानी, ओङ्गी, जारवा, सेण्टिनली इत्यादयः विशिष्टाः जनजातयः निवसन्ति । अण्डमानी- ओङ्गी-जारवा-जनजातीनाम् आजीविकायै सर्वकारः नारिकेलस्य उद्यानानां निर्माणम् अकरोत्। सेण्टिनली-जनजातीयाः समाजात् दूरे तिष्ठन्ति । तेषां जनसंख्या अपि स्वल्पा एव ।
सुरुचि: – महोदये! अत्र भ्रमणाय विशिष्टानि स्थानानि कानि ?
अध्यापिका – भवत्सु कोऽपि अस्मिन् विषये कथयितुम् इच्छति ?
सरलार्थ-
अध्यापिका – इस द्वीप में ‘सेल्युलर’ जेल है। इस जेल का दूसरा नाम ‘कालापानी’ भी है।
सुधीर – (आश्चर्य से) आचार्या, इसका क्या मतलब है?
सुरेखा – ‘कालापानी’ यह शब्द सुनकर ही डर लगता है।
अध्यापिका – सच है। भारत की स्वतन्त्रता के लिए युद्ध में लगे हुए क्रांतिकारियों को दबाने के लिए ब्रिटिश लोगों के द्वारा बनाया गया तीन मञ्जिला जेल है। यहीं महान देशभक्त स्वतंत्रता ( सेनानी) वीर सावरकर ने मातृभूमि की रक्षा के लिए दस साल तक कल्पना से परे बहुत ज़्यादा पीड़ा को सहन किया ।
मुकुन्दः – ओह! धन्य हैं वे स्वतंत्रता के वीर । उनके बलिदान से ही हम सुख से जी रहे हैं ।
सूर्यांश – आचार्या! यह स्थान ‘यूनेस्को’ संस्था के विश्व धरोहर की सूची में भी रखा गया है।
ऋचा – महोदया !, क्या इस द्वीप में लोग भी रहते हैं।
अध्यापिका – हाँ। वहाँ कुछ अण्डमानी, अङ्गी, जारवा, सेण्टिनली इत्यादि विशेष जनजातियाँ रहती हैं। अण्डमानी – ओङ्गी, जारवा जनजातियों के आजीविका के लिए सरकार ने नारियल के बागीचों का निर्माण किया । सेण्टिनली जनजाति समाज से दूर रहती हैं। उनकी जनसंख्या भी कम ही है।
सुरुचि – महोदया, यहाँ घूमने के लिए विशेष स्थान कौन से हैं?
अध्यापिका – आप में से कोई भी इस विषय में कहना चाहता है ?
(3)
राजर्षिः – आम् महोदये! अहं वक्तुम् इच्छामि। अहम् एकदा पित्रा सह भ्रमणाय तत्र अगच्छम् । वयं तत्र सर्वत्र प्रकृतेः हारित्यं नीलसमुद्रं च दृष्टवन्तः । वयं महात्मगान्धि- मरीन – राष्ट्रियम् उद्यानम्, नॉर्थ-बे-द्वीपम्, समुद्रिका – नौसेना समुद्रीय-सङ्ग्रहालयं, कालापत्थर-तटम्, विजयनगर-तटं च दृष्टवन्तः । तत्र भारतस्य समुद्रतटेषु राधानगर-तटस्य अत्यन्तं विशिष्टं स्थानम् अस्ति । तत्रत्यः श्वेतरेणुः, नीलं निर्मलं जलं पारदर्शि समुद्रतलं च अविस्मरणीयम् अस्ति।
अध्यापिका – उत्तमम्, राजर्षे! किं भवान् स्वराजद्वीपं दृष्टवान् ?
राजर्षि – न स्मरामि महोदये.!
अध्यापिका – स्वराजद्वीपे एलीफेण्टा-तटे, नॉर्थ-बे- अन्तरीपे च सिन्धुतलविहारं स्कूबाडाइविङ्ग्, स्नॉर्कलिङ्ग् इत्यादयः विविधाः गतिविधयः चलन्ति। समुद्रस्य अन्तर्भाग : विविधवर्णैः मत्स्यैः कच्छपै: अन्यैः जलचरै: प्रवालशृङ्खलाभिः च अलङ्कृतः इव दृश्यते ।
छात्रा: – महोदये! अण्डमान-जनाः आजीविकार्थं किं कुर्वन्ति ?
अध्यापिका – तत्र मुक्तामालाः, शुक्तिशिल्पानि, नारिकेल – शिल्पानि, उपस्कराः च इत्यादीनाम् उत्पादनेन वाणिज्येन च तेषाम् आजीविका चलति। केचन कृषिकार्येण मत्स्यव्यापारेण च जीविकां निर्वहन्ति ।
छात्रा: – आचार्ये! अस्य वर्णनं श्रुत्वा चित्राणि च दृष्ट्वा अस्माकं मनसि तत्र भ्रमणाय उत्सुकता जागरिता ।
अध्यापिका – अस्तु, वयम् अवश्यमेव तत्र शैक्षिक भ्रमणार्थं गमिष्यामः ।
अधुना वयं मिलित्वा गायाम: –
हुतात्मनां पूततपः स्थलीयं विनायकादिस्तुतिभाजनानाम् ।
स्वराष्ट्रधर्मं ननु शिक्षयन्ती सुदर्शनीया भुवि तीर्थकल्पा ।
सरलार्थ-
रविः – जी महोदय ! मैं कुछ कहना चाहता हूँ। एक बार मैं पिता जी के साथ घूमने के लिए वहाँ गया था। हमने वहाँ सब जगह हरियाली और नीला समुद्र देखा । हमने महात्मागांधी – मरीन, राष्ट्रीय उद्यान, उत्तरी खाड़ी द्वीप, समुद्री नौ सेना, समुद्रीय संग्रहालय, कालापत्थर बीच और विजयनगर बीच देखा। वहाँ भारत के समुद्र के किनारों पर राध नगर बीच का बहुत ही विशेष स्थान है। वहाँ पर स्थित सफ़ेद बालू, नीला शुद्ध पानी, आर-पार दिखने वाला समुद्र का तला न भूलने योग्य है।
अध्यापिका – बहुत अच्छा ! राजर्षि, क्या आपने स्वराज द्वीप देखा ?
रवि – याद नहीं है महोदया ।
अध्यापिका – स्वराजद्वीप में एलीफेण्टा बीच पर, उत्तरी खाड़ी द्वीप पर और समुद्र के तल पर विहार, स्कूबा डाइविंग, स्नार्कलिङ्ग इत्यादि अनेक प्रकार की गतिविधियाँ चलती हैं। समुद्र के अन्दर अनेक प्रकार के रंगों की मछलियों से कछुओं से और दूसरे जलजीवों के प्रवाल श्रृंखलाओं के द्वारा सजा हुआ-सा दिखाई देता है।
सभी छात्र – महोदया, अण्डमान के लोग अपने जीवन निर्वाह के लिए क्या करते हैं?
अध्यापिका – वहाँ मोतियों की माला, सीपी की कारीगरी, नारियल की कारीगरी और मसाले इत्यादि के उत्पादन के द्वारा और व्यापार के द्वारा उनका जीवन-निर्वाह होता है। कुछ खेती के काम से, मछलियों के व्यापार से अपने जीवन का निर्वाह (गुजारा) करते हैं।
सभी छात्र – आचार्या, इसका वर्णन सुनकर और चित्रों को देखकर हमारे मन में घूमने के लिए उत्सुकता जाग्रत हो गई है।
अध्यापिका – ऐसा है, हम सब अवश्य ही वहाँ शैक्षिक भ्रमण के लिए जाएँगे ।
आओ हम सब मिलकर गाते हैं-
शहीदों की तपस्या से पवित्र गणेश आदि (देवताओं) की स्तुति करने वालों की यह धरती निश्चित ही अपने राष्ट्र धर्म को सिखाती हुई पृथ्वी पर तीर्थस्वरूप देखने योग्य है।