Class 7 Sanskrit Chapter 4 HINDI TRANSLATION – न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्

इस पाठ में एक ऐसे सियार की कहानी बताई गई है, जो बहुत भूखा होता है। जंगल में लगी अंगूर की बेल को देखकर वह उसे खाने की बहुत कोशिश करता है। परंतु उस बेल की ऊँचाई तक वह पहुँच नहीं पाता है। आखिर में वह थककर बिना रसास्वाद लिए ही अंगूर को खट्टा कहता है।

शिक्षक: – प्रियच्छात्राः! एतत् चित्रं पश्यन्तु । चित्रे किं किम् अस्ति ?
एकः छात्रः – महोदय ! चित्रे वृक्षे अस्ति ।
एका छात्रा – महोदय ! शृगालः अस्ति । द्राक्षाफलानि अपि सन्ति ।
शिक्षक: – बहु सम्यक्। शृगालः किं करोति ?
द्वितीयः छात्रः – आचार्य! शृगालः द्राक्षाफलानि खादितुम् इच्छति । किन्तु न शक्नोति ।
शिक्षकः – अहो ! भवन्तः कथं जानन्ति ?
एका छात्रा – महोदय! वयम् एतां कथां मातृभाषया श्रुतवन्तः।
शिक्षक: – बहु समीचीनम्। तर्हि संस्कृतभाषायाम् एतां कथां गीतरूपेण गायामः अभिनयं च कुर्मः ।
एकः छात्रः – – अस्तु आचार्य! कृपया पाठयतु।

सरलार्थ-

शिक्षक – प्रिय छात्रो! इस चित्र को देखो । चित्र में क्या – क्या है ?
एक छात्र – श्रीमान जी ! चित्र में पेड़ है।
एक छात्रा – महोदय ! सियार, अंगूर भी हैं।
शिक्षक – बहुत अच्छा! सियार क्या कर रहा है?
द्वितीय छात्र – आचार्य! सियार अंगूर खाना चाहता है, किन्तु खा नहीं सकता।
शिक्षक – ओह! आप कैसे जानते हो?
एक छात्रा – महोदय! हम सबने इस कहानी को मातृभाषा में सुना है।
शिक्षक – बहुत ठीक। तो संस्कृत भाषा में इस कथा को गीत रूप में गाते हैं और अभिनय करते हैं।
एक छात्र – जी आचार्य! कृपया पढ़ाइए ।

(1)

एकः शृगालः
एकः शृगालः वनं गच्छति ।
पिपासा, तस्य बुभुक्षा
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति
सः वनं गच्छति, सः वनं गच्छति।
तत्र गच्छति, किमपि न लभते
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
सः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति
स्वेदः जायते, तृषा जायते
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते

एक सियार,
वह जंगल में जाता है।
प्यासा, भूखा
प्यास से, भूख से, जंगल में जाता है
वह जंगल में जाता है, वह जंगल में जाता है।
वहाँ जाता है, कुछ भी नहीं मिलता है।
यहाँ से भी जाता है, कुछ भी नहीं मिलता है

थक जाता है, दुखी हो जाता है।
वह थक जाता है, दुखी हो जाता है।
और क्या करता है? वह और क्या करता है?
बाईं ओर से देखता है, दाईं ओर से देखता है
आगे से देखता है, पीछे से देखता है।
पसीना आ जाता है, प्यास लग जाती है।
उसको पसीना आता है, प्यासा हो जाता है।

(2)

किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
पश्यति द्राक्षालतां
सः पश्यति द्राक्षाफलम्
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति
त्रिवारम् उत्पतति, पुन: पुनः उत्पतति
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते
किं कथयति ? सः किं कथयति ?
आम्लं द्राक्षाफलम्, आम्लं द्राक्षाफलम्
इत्येवं कथयति, सः पलायते
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।।

और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?
और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?
देखता है अंगूर की बेल
वह देखता है अंगूर
लताओं के ऊपर ऊपर दिखते हैं उसको वह फल
उसी समय उसके मुँह में पानी आ जाता है
और क्या करता है? वह और क्या करता है?
एक बार कूदता है, दो बार कूदता है
तीन बार कूदता है, बार-बार कूदता है।
पसीना आता है, उसकी मेहनत (बेकार) हो जाती है।
क्या कहता है? वह क्या कहता है ?
खट्टा अंगूर, खट्टा अंगूर
ऐसा कहते हुए वह भाग जाता है।
ऐसा कहते हुए वह भाग जाता है।

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