पुष्पों का उत्सव

          भारत उत्सव प्रिय देश है।यहाँ कही फसलों का उत्सव होता है, कहीं पशुओं का उत्सव होता है, कहीं धार्मिक उत्सव होता है और कहीं वाहनों का उत्सव होता है।इनमें से ही है।इनमें से ही एक फूलों का उत्सव है।यह “फूल वालों की सैर” इस नाम से प्रसिद्ध है।
          दिल्ली के महरौली क्षेत्र में अक्टूबर महीने में इसका आयोजन होता है।इस अवसर पर वहाँ बहुत प्रकार के फूल दिखाई देते हैं। परंतु प्रमुख आकर्षण तो फूलों से निर्मित पंखों का होता है।लोग यहाँ फूल के पंखे योगमाया मंदिर में और बख्तियार काकी के समाधि स्थल पर अर्पित करते हैं।कुछ गुलाब के फूलों से बने हुए, कुछ कनेर के फूलों से बने हुए,कुछ जवाकुसुम या गुड़हल के फूलों से बने हुए, कुछ चमेली के फूलों से बने हुए और बाकी गेंदे के फूलों से बने हुए पंखे लाते है।
          यह  उत्सव 3 दिनों तक चलता है। इन दिनों पतंगबाजी (पतंगों को उड़ाना) विभिन्न प्रकार के खेल और मलयुद्ध भी चलता है।
      पिछले 200 सालों से पुष्पोत्सव लोगों को आनंदित कर रहा है। बीच में यह परंपरा स्थगित (बंद)  थी।परंतु स्वतंत्रताप्राप्ति के बाद यह मनोहारी परंपरा पुनः आरंभ हुई। फूलों का उत्सव आज भी उल्लास और उत्साह के साथ चल रहा है। 

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