रासो साहित्य

संज्ञा परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

संज्ञा  किसी जाति, द्रव्य, गुण, भाव, व्यक्ति, स्थान और क्रिया आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। जैसे – पशु (जाति), सुन्दरता (गुण), व्यथा (भाव), मोहन (व्यक्ति), दिल्ली (स्थान), मारना (क्रिया)। यह पाँच प्रकार की होती है — 1. व्यक्तिवाचक संज्ञा 2. जातिवाचक संज्ञा 3. समूहवाचक संज्ञा 4. द्रव्यवाचक संज्ञा 5. भाववाचक संज्ञा     […]

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1 December 2022

मुख्य समाचार ◼️भारत आज जी-20 की अध्‍यक्षता विधिवत ग्रहण करेगा, इस अवसर पर देशभर में कई आयोजन, एक सौ स्‍मारकों पर जी-20 के प्रतीक चिन्‍ह के साथ रोशनी की जाएगी ◼️गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान आज, 19 जिलों की 89 सीटों पर वोट डाले जाएंगे ◼️राष्‍ट्रपति द्रौपदी मूर्मु ने राष्‍ट्रपति भवन

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अभ्यास-5

प्र० 1 एकपदेन उत्तरत- (क) ‘पण्डिता’ ‘सरस्वती’ इति उपाधिभ्यां का विभूषिता? (ख) रमा कुतः संस्कृतशिक्षां प्राप्तवती? (ग) रमाबाई केन सह विवाहम् अकरोत्? (घ) कासां शिक्षायै रमाबाई स्वकीयं जीवनम् अर्पितवती? (ङ) रमाबाई उच्चशिक्षार्थं कुत्र आगच्छत्? उत्तर- (क) ‘पण्डिता’ ‘सरस्वती’ इति उपाधिभ्यां पंडिता रमाबाई विभूषिता। (ख) रमा स्वमातुः संस्कृतशिक्षां प्राप्तवती। (ग) रमाबाई विपिनबिहारीदासेन सह विवाहम् अकरोत्। (घ)

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अभ्यास पाठ-4

प्र०1 उच्चारणं कुरुत-  उपरि अधः उच्चैः नीचैः बहिः अलम् कदापि अन्तः पुनः कुत्र कदा एकदा उत्तर-विद्यार्थी इसका उच्चारण स्वयं करें। प्र० 2 मञ्जूषातः अव्ययपदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत- अलम् अन्तः बहिः अधः उपरि (क) वृक्षस्य ……………………. खगाः वसन्ति। (ख) ……………………. विवादेन। (ग) वर्षाकाले गृहात् ………………… मा गच्छ। (घ) मञ्चस्य ……………………….. श्रोतारः उपविष्टाः सन्ति। (ङ) छात्राः विद्यालयस्य

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अभ्यास पाठ-3

प्र०1 उच्चारणं कुरुत। विंशतिः त्रिंशत् चत्वारिंशत् द्वाविंशतिः द्वात्रिंशत् द्विचत्वारिंशत् चतुर्विंशतिः त्रयस्त्रिंशत् त्रयश्चत्वारिंशत् पञ्चविंशतिः चतुस्त्रिंशत् चतुश्चत्वारिंश्त अष्टाविंशतिः अष्टात्रिंशत् सप्तचत्वारिंशत् नवविंशतिः नवत्रिंशत् पञ्चाशत् उत्तर-विद्यार्थी इसका उच्चारण स्वयं करें।Page No 14: प्र० 2 अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि लिखत- (क) कस्य भवने सर्वविधानि सुखसाधनानि आसन्? (ख) कस्य गृहे कोऽपि भृत्यः नास्ति? (ग) श्रीकण्ठस्य आतिथ्यम् के अकुर्वन्? (घ) सर्वदा कुत्र सुखम्? (ङ)

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अभ्यास पाठ-2

प्र०1 उच्चारणं कुरुत।  फुल्लोत्पलम् अवलम्ब्य पक्त्वा कम्बुग्रीवः आवाभ्याम् भक्षयिष्यामि उक्तवान् ह्रदम् सुहृदाम् भवद्भ्याम् उड्डीयते भ्रष्टः उत्तर- विद्यार्थी इसका उच्चारण करें | प्र० 2 एकपदेन उत्तरत- (क) कूर्मस्य किं नाम आसीत्? (ख) सरस्तीरे के आगच्छन्? (ग) कूर्मः केन मार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छति? (घ) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा के अधावन्? उत्तर- (क) कूर्मस्य कम्बुग्रीवः नाम आसीत् (ख) सरस्तीरे

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अहह और आः

अजीज सरल और परिश्रमी था।वह स्वामी की सेवा में ही लगा रहता था।एक बार उसने घर जाने के लिए अवकाश मांगा। स्वामी चालाक था | उसने सोचा- “अजीज की तरह कोई भी दूसरा कार्यकुशल नहीं है।यह अवकाश का भी वेतन ग्रहण करेगा।”यह सोचकर स्वामी ने कहा- “मैं तुम्हें अवकाश और वेतन का सारा धन दे

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विमान बनाएँ

राघव ! माधव ! सीता ! ललिता! आओ विमान बनाएँ | नीले, विशाल, निर्मल गगन में वायु की सैर करें। उन्नत वृक्षों भवनों को पार करके निश्चय ही आकाश में जाये। हिम युक्त सोपान (सीढ़ी) से चंद्रलोक में प्रवेश करें। शुक्र, चंद्रमा, सूर्य, गुरु आदि सभी ग्रहों की गणना करें। विभिन्न प्रकार के सुंदर तारों

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दसवें तुम हो

एक बार दस बालक स्नान करने के लिये नदी पर गए ।उन्होंने देर तक नदी के जल में स्नान किया।उसके बाद वे सब तैर कर पार चले गए। तब उनके नायक ने पूछा-क्या सभी बालकों ने नदी पार कर ली है? तब किसी बालक ने गिना-एक , दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ, नौ

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पुष्पों का उत्सव

भारत उत्सव प्रिय देश है।यहाँ कही फसलों का उत्सव होता है, कहीं पशुओं का उत्सव होता है, कहीं धार्मिक उत्सव होता है और कहीं वाहनों का उत्सव होता है।इनमें से ही है।इनमें से ही एक फूलों का उत्सव है।यह “फूल वालों की सैर” इस नाम से प्रसिद्ध है। दिल्ली के महरौली क्षेत्र में अक्टूबर महीने

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