रासो साहित्य

परोपकारी

नारायणकूटं नाम ग्रामः। तत्र रमणः नाम परोपकारी वसति स्म। एकदा महत्या वृष्ट्या चण्डमारुतेन च वृक्षाः पतिताः गृहाणि शिथिलानि जातानि। बहवः निर्गतिकाः अभवन्। रमणः गृहं गृहम् अटित्वा धनं सङ्गृहीतवान्। निर्गतिकानां कृते तेन धनेन कुटीरान् निर्माप्य दत्तवान्। एतत् पुण्यकार्यार्थं ग्रामीणाः सर्वे धनं दत्तवन्तः। किन्तु धनगुप्तः नाम धनिकः एकं नाणकम् अपि न दत्तवान्। अधिकदानं ये कृतवन्तः तेषां नामानि […]

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सफलः त्यागः

इराक् देशे लघुराज्यम् आसीत्। तत् राज्यं कश्चित् राजा पालयति स्म। सः तरुणः आसीत्। केनापि कारणेन अविवाहितः च। तस्मिन् राज्ये बहु भिक्षुकाः आसन्। तेषु दृढकायाः पुरुषाः सबलाः स्त्रियः च आसन्। एकदा भिक्षुकाणां विषये महाराजस्य जुगुप्सा सञ्जाता। अतः राजा चिन्तितवान् – एते भिक्षुकाः अपस्वरेण रटन्तः जनान् पीडयन्ति। देवमन्तिरे उद्याने इति यत्र कुत्रापि गत्वा तत्परिसरं मलिनयन्ति। केचन सशक्ताः

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मूलधनम्

एकस्मिन् ग्रामे परमेशः इति कृषिकः। तस्य अल्पा भूमिः। वृष्टिः अपि काले काले न भवति। सः परिश्रमेण कृषिं करोति स्म। तस्य पत्नी गौरी इति। सा अपि कष्टसहिष्णुः। सा सर्वदा सर्वेषु कार्येषु पत्युः साहाय्यं कर्तुम् इच्छति स्म। तयोः चत्वारः पुत्राः सञ्जाताः। परमेशः पत्नीं पुत्रपालने नियुज्य एकाकी कृषिकार्यं करोति स्म। पुत्राणां नामानि जयेशः नरेशः उमेशः रमेशः च। परमेशः

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स्थूलः वामनः च

कश्चित् ग्रामः। तत्र रामिलः नाम कश्चित् श्रेष्ठी वसति स्म। तस्य पत्नी जीवम्मा इति। तयोः दम्पत्योः सोमः नाम एकः एव पुत्रः। मातापित्रोः परमप्रीतिपात्रं सोमः। सः यत् यत् इच्छति तत् सर्वं तस्य कृते दातुं रामिलस्य प्रयत्नः। जीवम्मा अपि अस्मिन् विषये पुत्रपक्षपातिनी एव आसीत्। अतः सोमस्य बुद्धेः अपेक्षया देहः सम्यक् वर्धितः। गच्छता कालेन सोमः तरुणः अभवत्। तस्य वयः

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अरस्तू का विरेचना का सिद्धांत

प्लेटो ने काव्य पर आरोप लगाया था कि काव्य हमारी वासनाओं का दमन करने के स्थान पर उनका पोषण करता है। अरस्तू का मत इससे भिन्न है। वे यह तो मानते हैं कि काव्य मानवीय वासनाओं का दमन नहीं करता, पोषण ही करता है, पर वे यह स्वीकार नहीं करते कि वह अनैतिक भावनाओं को

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लोंज़ाइनस: काव्य में उदात्त तत्त्व

प्लेटो और अरस्तू के बाद यूनानी काव्यशास्‍त्र में लोंजाइनस का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। उनका समय ईसा की प्रथम या तृतीय सदी के मध्य माना गया है। लोंजाइनस के नाम से जो ग्रन्थ प्रसिद्ध है, उसका यूनानी नाम है पेरि इप्सुस। शताब्दियों की उपेक्षा और विस्मृति के बाद इतावली विद्वान रोबेरतेल्लो ने इसे सन् 1554

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प्रारंभिक परीक्षा – पाठ्यक्रम

प्रारंभिक परीक्षा – पाठ्यक्रम हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ‘हरियाणा सिविल सेवा’ (HCS) प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र शामिल हैं। पहला प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ का है जबकि दूसरे को ‘सिविल सेवा अभिवृत्ति परीक्षा’ (Civil Services Aptitude Test) या ‘सीसैट’ कहा जाता है। दोनों प्रश्नपत्र 100-100 अंकों के होते हैं तथा इनके प्रश्नों की प्रकृति

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HPSC HCS Recruitment 2023

HPSC HCS Recruitment 2023 Notification Released Apply Online HPSC HCS Recruitment 2023: Haryana Public Service Commission (HPSC) has released the notification for the Haryana Civil Services (HCS) and Allied Services Examination 2023. Eligible Male and Female Indian Citizens can apply online for the Haryana Civil Service Exam 2023 from the website hpsc.gov.in starting from February

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चित्र कहानी लेखन ( Picture Story Writing)

कहानी लेखन एक ऐसी विधा है जो हिंदी तथा अंग्रेजी साहित्य को एक अलग पैमाने पर खड़ा करती है। कहानी पढ़ना और सुनना जितना आसान होता है, कहानी लिखना उतना ही कठिन होता है, क्योंकि कहानी एक काल्पनिक घटना होती है, जिसे वास्तविक घटना में परिवर्तित करना होता है, तथा परिवर्तन के समय सभी प्रकार

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आधे-अधूरे नाटक (मोहन राकेश) का समीक्षात्मक अध्ययन

नाटक का विषय मध्यवार्गीय जीवन की विडंबनाओं का चित्रण पारिवारिक विघटन का चित्रण स्त्री-पुरुष सम्बन्ध का चित्रण नारी की त्रासदी का चित्रण वैवाहिक संबंधों की विडंबना मुख्य बिंदु ‘आधे-अधूरे’ नाटक 1969 में प्रकाशित हुआ था। आधे-अधूरे नाटक का पहली बार ‘ओमशिवपुरी’ के निर्देशन में दिशांतर द्वारा दिल्ली में फरवरी 1969 में मंचन हुआ था। यह

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