आज का जो दौर
आज का जो दौर है लोग बिक रहे हर और हैं कहीं चीखें कहीं किलकारियां कहीं वाहनों का शोर है हर किसी को सिर्फ अपने स्वार्थ की प्रतिपूर्ति की अपेक्षा है निस्वार्थियों को टोलियाँ जा रहीं किस और हैं कहीं आते जीवन की सुबह कहीं मौत के अँधेरे का छोर है कहीं जात पात कहीं […]