कृष्णा सोबती

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नाम कृष्णा सोबती
जन्म 18 फरवरी 1925 ई०
जन्म स्थान गुजरात ( अब पाकिस्तान में )
मृत्यु 25 जनवरी 2019
राष्ट्रीयता भारतीय
ज्ञानपीठ पुरस्कार 2017
साहित्य अकादमी पुरस्कार ज़िन्दगीनामा(1980)

हिंदी कथा साहित्य में कृष्णा सोबती की विशिष्ट पहचान है. वह कहती है की “कम लिखना और विशिष्ट लिखना” यही कारण है उनके संयमित लेखन और साफ़-सुथरी रचनात्मकता ने अपना एक नया पाठक वर्ग बनाया है. उनके कई उपन्यासों, कहानियों और संस्मरणों ने हिंदी के साहित्यिक संसार में अपनी दीर्घजीवी उपस्थिति सुनिश्चित की है. सोबती को उनके 1966 के उपन्यास मित्रो मरजानी के प्रकाशित होने के बाद एक नई पहचान मिली थी. उन्होंने हिंदी साहित्य को कई ऐसे यादगार चरित्र दिए हैं, जिन्हें अमर कहा जा सकता है; जैसे- मित्रो, शाहनी, हशमत आदि. उनकी लिखी गई रचनाएँ आज तक हिंदी विषय की पुस्तकों में आती है और विघालय में पढाई जाती है.

भारत-पाकिस्तान पर जिन लेखकों ने हिंदी में कालजयी रचनाएँ लिखीं, उनमें कृष्णा सोबती का नाम पहली कतार में लिखा गया है, क्योंकि उस समय यशपाल के झूठा सच, राही मासूम रज़ा के आधा गाँव और भीष्म साहनी के तमस के साथ-साथ कृष्णा सोबती की जिंदगीनामा यह सभी रचनाएँ उस समय अलग-अलग कविं- कवित्री द्वारा लिखी गई थी और सोबती जी की लिखी गई इस प्रसंग में एक विशिष्ट उपलब्धि है. कृष्णा सोबती के प्रकाशनों का अनुवाद कई भारतीय और विदेशी भाषाओं में किया गया है.

जन्म और परिवार

कृष्णा सोबती का जन्म 18 फ़रवरी सन् 1925 गुजरात में हुआ था और सन् 1942 के भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद गुजरात का वह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया, जिसके बाद वह भारत आकर बस गई. उनकी शिक्षा दिल्ली और शिमला में शुरू हुई एवं उन्होंने अपने तीन भाई-बहनों के साथ स्कूल में पढ़ाई की और उनके परिवार ने औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार के लिए काम किया था. उन्होंने लाहौर के फतेहचंद कॉलेज में अपनी उच्च शिक्षा शुरू की तब उस समय जब भारत का विभाजन हुआ तो वे भारत लौट आईं. उन्होंने 70 साल की उम्र के बाद शिवनाथ जी के साथ शादी की. बीमारी के कारण उनका 25 जनवरी 2019 को स्वर्गवास हो गया.

प्रमुख रचनाएँ, प्रमुख सम्मान, उपन्यास, प्रसिद्ध लघु कथाएँ-

प्रमुख रचनाएँ : जिंदगीनामा, दिलोदानिश, ऐ लड़की, समय सरगम (उपन्यास); डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, बादलों के घेरे, सूरजमुखी अँधेरे के, (कहानी संग्रह); हम-हशमत, शब्दों के आलोक में (शब्दचित्र, संस्मरण).
प्रमुख सम्मानः साहित्य अकादमी सम्मान, हिंदी अकादमी का शलाका सम्मान, साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता सहित अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार.
उपन्यास – दार से बिचुरी, सूरजमुखी अंधेरे के, यारों के यार, जिंदगीनामा
प्रसिद्ध लघु कथाएँ – नफीसा, सिक्का बादल गया, बदलोम के घर

कहानी संग्रह-

बादलों के घेरे- 1980

लंबी कहानी (आख्यायिका/उपन्यासिका)-

डार से बिछुड़ी- 1958

मित्रो मरजानी- 1967

यारों के यार- 1968

तिन पहाड़- 1968

ऐ लड़की- 1991

जैनी मेहरबान सिंह- 2007 (चल-चित्रीय पटकथा; ‘मित्रो मरजानी‘ की रचना के बाद ही रचितपरंतु चार दशक बाद 2007 में प्रकाशित)

उपन्यास-

सूरजमुखी अँधेरे के -1972

ज़िंदगीनामा- 1979

दिलोदानिश- 1993

समय सरगम- 2000

गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान -2017 (निजी जीवन को स्पर्श करती औपन्यासिक रचना)

विचार-संवाद-संस्मरण-

हम हशमत (तीन भागों में)

सोबती एक सोहबत

शब्दों के आलोक में

सोबती वैद संवाद

मुक्तिबोध : एक व्यक्तित्व सही की तलाश में -2017

लेखक का जनतंत्र -2018

मार्फ़त दिल्ली -2018

यात्रा-आख्यान-

बुद्ध का कमंडल : लद्दाख़

पुरस्कार

  • 1981 में शिरोमणि पुरस्कार दिया गया.
  • 1982 में हिंदी अकादमी पुरस्कार दिया गया.
  • दी अकादमी दिल्ली का शलाका पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • 1999 में लाइफटाइम लिटरेरी अचीवमेंट के लिए चूड़ामणि पुरस्कार दिया गया.
  • 2005 में भारतीय भाषा कथा अनुवाद श्रेणी में क्रॉसवर्ड पुरस्कार जीता.
  • 2017 में इन्हे ज्ञानपीठ पुरुस्कार देकर समानित किया गया था.
  • कृष्णा सोबती की उपलब्धियाँ

    1. सन् 1980-82 में पंजाब विश्वविद्यालय द्वाराुेलोशिप का सम्मान दिया गया।
    2. कृष्णा सोबती जी को 1996-97 में मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ।
    3. सन् 1999 में कल्पनाशील रचना धार्मिकता के लिए ‘रामकृष्ण जायदवाल हारमानी अवार्ड’ का सम्मान दिया गया।
    4. सन् 2000 में कृष्णा सोबती जी को ‘आचार्य शिवपूजन सहाय शिखर सम्मान’ बिहार में दिया गया।
    5. हिन्दी, उर्दू कुम्भ 20, मार्च 2006 में भारतीय भाषा परिषद के मंत्री डॉ. कुसुम खोमनी द्वारा कृष्णा सोबती जी का साहित्य में समकालीन लेखिका के रूप में सम्भाषण किया गया।
    6. कृष्णा सोबती कृत ‘समय सरगम’ उपन्यास के लिए के. के. बिडलाफउण्डेशन द्वारा 17वाँ ‘व्यास सम्मान’ से 2007 में लखनऊ विश्वविद्यालय में विभूषित किया।
    7. दिल्ली हिन्दी अकादमी का ‘श्लाका’ सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
    8. कृष्णा सोबती जी को सन् 1980 में ‘साहित्य शिरोमणि’ पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
    9. सन् 1980 में ‘जिन्दगीनामा’ उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला।
    10. वर्ष 1982 में हिन्दी अकादमी दिल्ली के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
    11. वर्ष 1999 में जीवन पूर्ण साहित्य उपलब्धि के लिए पहला ‘‘कथा चूड़ामणि” पुरस्कार मिला।
    12. वर्ष 2017 में देष के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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